रोहतक में सोमवार को दिल्ली बार्डर पर चल रहे धरने में शामिल होने के लिए ट्रैक्टर ट्राली से जा रहे क?
कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर आंदोलनकारियों का दिल्ली कूच जोरों पर है। सोमवार को भी सैकड़ों ट्रैक्टर सवार किसानों ने दिल्ली की ओर कूच किया। इस दौरान खरावड़ में किसानों का फूलों से स्वागत किया गया। यहां भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहा के अध्यक्ष जोगेंद्र सिंह भी पहुंचे। इन्होंने ग्रामीणों के शिविर व सेवा सहयोग को सराहा। इधर, मकड़ौली में भी धरना जारी रहा। यहां से करीब 125 ग्रामीण 10 ट्रैक्टरों में सवार होकर टीकरी बॉर्डर रवाना हुए। किसान आंदोलन को लेकर ग्रामीणों में जोश बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि हर दिन सैकड़ों की संख्या में लोग टीकरी बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं। सोमवार को मकड़ौली से 125 ग्रामीण दस ट्रैक्टरों में सवार होकर टीकरी बॉर्डर पहुंचे। इससे पूर्व रविवार को धामड़ से दस ट्रैक्टर दिल्ली की ओर रवाना हुए थे। मकड़ौली टोल पर किसानों का धरना जारी है। यहां रागिनी व महिलाओं के लोक गीतों ने आंदोलनरत किसानों को बांधे रखा। खरावड़ में किसानों के लिए शिविर में लंगर सेवा 29 नवंबर से जारी है। यहां सोमवार को पहुंचे किसानों का फूलों से स्वागत किया गया। पंजाब व प्रदेश के दूर-दराज इलाकों से यहां पहुंचे किसानों ने भोजन कर खुद को तृप्त किया व टीकरी बॉर्डर की ओर कूच किया। भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहा के अध्यक्ष जोगेंद्र सिंह ने कहा कि आंदोलनकारियों की सेवा कर ग्रामीण आंदोलन में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसे सीमा पर चल रहे संघर्ष से कम नहीं आंका जाना चाहिए। किसानों का यह संघर्ष रंग लाएगा।
आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश नहीं होगी सफल : अनिल
इंटरनेट सेवाएं बंद करने व पत्रकारों पर किए जा रहे केस दर्ज को लेकर भारतीय किसान यूनियन के अंबावत के प्रदेश अध्यक्ष अनिल नांदल उर्फ बल्लू प्रधान ने सरकार की कड़ी निंदा की है। अपने बयान में सोमवार को उन्होंने कहा कि सरकार ओछे हथकंडे अपनाकर किसान आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। इसमें वह कभी सफल नहीं होगी। सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का काम किया है। किसान आंदोलन को दबाने की आड़ में इंटरनेट सेवा बंद करना मौजूदा समय में सही नहीं है। सरकार जल्द इंटरनेट सेवाओं को सुचारु करें, ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो। पत्रकारों पर मुकदमे दर्ज कर किसान आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रच रही सरकार ज्यादती व अन्याय करना बंद करे। दर्ज केस वापस ले। ऐसा नहीं करने का खामियाजा सरकार को आने वाले समय में भुगतान पड़ेगा।