केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमण काल में अपना आम बजट पेश किया। बेरोजगारी व महंगाई का समाधान करने वाले प्रयास के बगैर जारी बजट पर महामारी का असर साफ पड़ता नजर आ रहा है। टैक्स में छूट व टैक्स सरलीकरण का कोई उपाय नहीं किया गया है। संक्रमण से लोगों का स्वास्थ्य सुरक्षित रखने में भी जर्जर हाल सरकारी ढांचे ने ही व्यवस्था संभालने का प्रयास किया है। शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए कम बजट रखना चिंता का विषय है। पेट्रोल व डीजल पर लगाए गए सेस को किसान हित व कल्याणकारी बताया गया है। हालांकि कुछ ने इसे पेट्रो पदार्थों के दाम बढ़ाने वाला करार दिया है। इसका असर भी महंगाई पर पड़ेगा। खाने-पीने तक की चीजें महंगी होंगी। यह कहना है शहर के बुद्धिजीवियों का। वे सोमवार को बजट सत्र के चलते अमर उजाला कार्यालय में आयोजित परिचर्चा में शामिल हुए थे।
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सरकार ने आम बजट पेश किया है। इसमें स्वास्थ्य बजट कम रखा गया है। महामारी व स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान पर ध्यान नहीं दिया गया है। पिछले वर्ष के बजट का भी लगभग 50 प्रतिशत वैक्सीन पर ही खर्च कर दिया गया। ऐसे में नए बजट में बेहतर प्रावधान की जरूरत थी।
-हिमालय शर्मा, अस्पताल प्रशासक
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कोरोना ने 40 करोड़ लोगों को बीपीएल रेखा से नीचे धकेल दिया है। महामारी काल में संक्रमण से बचाव को लेकर देश के जर्जर हाल सरकारी ढांचे ने ही व्यवस्था संभालने का प्रयास किया। सरकार निजी हाथों में व्यवस्था सौंपने के बजाय सरकारी को बेहतर बनाए। बजट जरूरत से कम है।
-डॉ. आरएस दहिया, सेवानिवृत्त सर्जन, पीजीआईएमएस
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सरकार ने बजट में पेट्रोल पर ढाई व डीजल पर चार रुपये प्रति लीटर सेस लगाया है। इससे सरकार को अतिरिक्त आय होगी। यह किसान हित व किसानों के कल्याण पर ही खर्च होगा। इसका किसानों व अन्य लोगों को भी लाभ मिलेगा। सेस लगाए जाने से महंगाई बढ़ने के बारे में कुछ कहना मुश्किल है।
-हर्ष गिरधर, अध्यक्ष, हरियाणा अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन
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कोरोना के कारण बजट से लोगों को काफी उम्मीदें थी। खासकर स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर बजट व महामारी पर अंकुश के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत भी है। सरकार ने जरूरत से कम बजट दिया है। दुकानदारों, व्यवसायियों व उद्योगपतियों के लिए राहत की उम्मीद थी। यह भी बजट से पूरी नहीं हुई।
-नीटू सिंहपुरिया, महासचिव, मार्बल एंड टाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन
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सरकार ने आम बजट जनहित में जारी किया है। इसमें व्यवस्था दुरुस्त बनाने के बेहतर प्रयास किए गए हैं। लोहा सस्ता होने से मकान बनाना आसान होगा। इससे काम ही नहीं बाजार में भी तेजी जाएगी। लोगों का भी घर बनाने का सपना साकार होगा। बाजार अब कोरोना की मार से उबरने लगा है।
-राजू भूटानी, प्रधान, मार्बल एंड टाइल ट्रेेडर्स एसोसिएशन
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महामारी के संक्रमण ने सभी को प्रभावित किया है। साल भर से कैटरर बेरोजगार हैं। शादियां या समारोह नहीं होने के कारण आय नहीं हुई है। इस कारण कर देना भी मुश्किल रहा। नए बजट से राहत की उम्मीद थी। यह अधूरी रही। गांवों को आगे लाने पर ध्यान देने व उन्हें प्रेरित करने की जरूरत है।
-दीपू नांगपाल, प्रधान, कैटरिंग एसोसिएशन
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सरकार ने पेट्रोल व डीजल पर सेस गलत लगाया है। इससे महंगाई बढ़ेगी। फेसलैस एसेसमेंट का बजट में नया व अच्छा प्रावधान है। इससे गड़बड़ी रुकेगी। रिटर्न जल्द कराना आसान होगा। बेरोजगारी को सरकार ने छोड़ दिया है। टैक्स में छूट नहीं दी गई है। इसके प्रावधान की लोगों को बजट में उम्मीद थी।
-अशोक कुमार जांगड़ा, अधिवक्ता
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देश में बेरोजगारी व महंगाई बढ़ रही है। बजट में इसे लेकर प्रावधान नहीं किया है। कृषि व किसानों की स्थिति के बावजूद किसान को लाभ नहीं दिया गया है। बजट का सरलीकरण नहीं किया गया है। व्यापारी व आम आदमी की समस्याओं के समाधान पर ध्यान नहीं दिया गया है। शिक्षा बजट भी कम है।
-डॉ. राजेश कुमार, शिक्षक, अर्थशास्त्र विभाग, एमडीयू
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बजट से मध्यम वर्ग पूरी तरह निराश रहा है। आयकर स्लैब में बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने 75 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों को आयकर में छूट दी है। यह भी केवल पेंशन भोगियों के लिए है। ऐसे में लोग कम हैं। वर्ष 2014 से आयकर में छूट नहीं बढ़ाई गई है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाना निराशाजनक है।
-डॉ. एनसी गर्ग, एसोसिएट प्रोफेसर, कॉमर्स, वैश्य कॉलेज
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सरकार ने अपने बजट में शिक्षा को पूरी तरह बिसराया है। नई शिक्षा नीति के तहत जीडीपी का छह प्रतिशत बजट देने का दावा किया गया था। जबकि बजट में ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा है। इसके विपरीत बजट कम दिया गया है। इससे आम आदमी शिक्षा से दूर होगा। महिलाओं व दलितों पर इसका स्पष्ट असर नजर आएगा।
-सुरेंद्र सिंह, छात्र, एमफिल
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सरकार ने बजट में शिक्षा को लेकर मजबूत प्रावधान नहीं किए हैं। निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। पीपीपी मोड पर सौ सैनिक स्कूल व 15 हजार स्कूलों को मॉडल स्कूलों की तर्ज पर शुरू कर इनका निजीकरण किया जा रहा है। आम आदमी नीम-हकीम के भरोसे हैं। स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया है।
-अर्जुन सिंह, छात्र, एलएलबी।
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कोरी बयानबाजी है आम बजट : किसान सभा
रोहतक। किसान सभा हरियाणा राज्य कमेटी ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के बजट को किसानों के लिए किसी प्रकार की राहत न देने वाला व कोरी बयानबाजी का बजट करार दिया है। कृषि पर होने वाले खर्च को बढ़ाने के बजाय घटाया गया है। कृषि कानूनों के खिलाफ दो माह से दिल्ली के चारों तरफ किसान बैठें हैं। उसके बावजूद बजट में किसानों की वास्तविक मांगों को छोड़कर किसानों का अपमान किया गया है। अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य प्रधान फूल सिंह श्योकंद व कार्यकारी सचिव सुमित सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार का बार-बार यह कहना कि सरकार किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह मात्र दिखावा है। केंद्रीय वित्तमंत्री के बजट में किसानों को राहत देने के दावे खोखले हैं। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कृषि पर आवंटन को घटा दिया गया है। किसानों को लागत का डेढ़ गुना दाम देने का दावा भी बेबुनियाद है। सरकार पिछले 5 साल से किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात कर रही है। इसके बावजूद बजट में इसका कोई जिक्र नहीं है।