कृषि कानून के विरोध में दिल्ली बार्डर पर किसानों के धरने में शामिल होने के लिए जा रहे किसानों के ल
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रोहतक। किसान आंदोलन की तपिश भावी पीढ़ी भी महसूस करने लगी है। यह तपिश उनमें आंदोलन का नया उन्माद व जोश भरने का काम रही है। शायद यही वजह है कि मासूमों ने अपने गुल्लक तोड़ कर आंदोलनकारी किसानों की सेवा के लिए राशि दान की। कल्हावड़ व फरमाणा के चार भाई बहनों ने 6100 रुपये दान दिए हैं। यह राशि भले कम हो, मगर उनका आंदोलन को लेकर योगदान बड़ा है।
कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली सीमा पर चल रहा किसान आंदोलन हर दिन मजबूत होता जा रहा है। हर दिन यहां किसानों की संख्या बढ़ती जा रही है। इन आंदोलनकारियों की सेवा के लिए कल्हावड़ में लगे शिविर उन्हें राहत पहुंचाकर इलाके के किसान इस आंदोलन में अपना अदृश्य सहयोग दे रहे हैं। यही नहीं यहां के बच्चे भी इस आंदोलन से अछूते नहीं रहे हैं। उनकी सोच व जज्बा बड़ों से कम नहीं है।
कल्हावड़ निवासी मनमीत व पूर्वा ने अपने जेब खर्च से बचे रुपये गुल्लक में जमा किए थे। बच्चों ने यह गुल्लक तोड़ कर इसमें रखे रुपये निकाल कर दादा जसवंत सिंह मलिक को दिए। यह राशि पांच हजार रुपये थी। दादा ने बच्चों से रुपये के बारे में पूछा तो उन्होंने गुल्लक की ओर इशारा कर दिया। जब दादा ने उनसे रुपये देने की वजह पूछी तो बच्चों का अपनी मिट्टी से जुड़ाव देखकर उनकी आंखें डबडबा आई। बच्चों ने कहा कि दादा ये रुपये आंदोलन में जा रहे किसानों की मदद के लिए अपने शिविर दे देना।
यही नहीं इन बच्चों के साथ किसान जसवंत सिंह मलिक के नाती नैतिक व नातिन दीक्षा ने भी अपनी गुल्लक से 1100 रुपये शिविर के लिए दान किए हैं। ये बच्चे शिविर पर भी पहुंचे। यहां अपने हाथों से दिल्ली जाने वाले पंजाब से आए किसानों भोजन कराने में सहयोग दिया। शिविर में जुटे अन्य लोगों ने भी बच्चों के प्रयास काफी सराहा।