रोहित राठौर
रोहतक। किलोई अनाज मंडी में 25 वर्षों से प्रशासनिक दावों के बावजूद मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। इस मंडी में मात्र 2.5 एकड़ का सीमित पक्का क्षेत्र है जबकि आवक इससे दस गुना से अधिक रहती है। इससे अनाज खुले में पड़ा रहता है और बारिश होने पर गेहूं खराब तक हो जाता है।
आढ़तियों व ग्रामिणों के अनुसार, वर्ष 1999 से चालू किलोई अनाज मंडी में आज भी हजारों क्विंटल गेहूं और अन्य अनाज 30 से अधिक एकड़ में खुले में पड़ा रहता है। मात्र मात्र 2.5 एकड़ क्षेत्र पक्का के बाद भी कच्चे फर्श या मिट्टी पर गेहूं पड़ा रहता है।
बारिश और आंधी में अनाज भीगकर खराब होने की शत-प्रतिशत संभावना है। किसानों और आढ़तियों का कहना है कि सालों से मंडी में टिन-शेड की कमी है जिससे फसल खुले आसमान के नीचे रहती है।
चहारदीवारी न होने से आवारा पशु और चोरी का डर भी बना रहता है। बारिश के समय किसानों का अनाज भीग जाता है। इससे नमी के कारण उसका रंग फीका पड़ जाता है और सरकारी खरीद में दिक्कत आती है। हालात इतने बदतर हैं कि आढ़तियों के बैठने के लिए पक्के कमरे नहीं हैं। मंडी में रिकॉर्ड और बायोमेट्रिक मशीनें टेंट में रखी जा रही हैं। यह सुरक्षा के लिहाज से बेहद असुरक्षित है। संवाद
अस्पताल में समय पर नहीं मिल रही दवाई व इलाज
किलोई दोपाना के वार्ड-13 पंचायत सदस्य दीपक जांगड़ा ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को समय पर दवाई नहीं मिल रही हैं। अनेक दवा केंद्र पर उपलब्ध ही नहीं है। वहीं, शहीद नफे सिंह राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए पीने के पानी व्यवस्था नहीं है। कैंपरों के सहारे ही काम चलाया जा रहा है। दीपक ने बताया कि प्रशासन को गांव में पशुओं के लिए बने जाेहड़ों की चहारदीवारी करवानी चाहिए जिससे गंदा पानी जोहड़ में न जाए। इससे पानी भी साफ रहे और पशु भी बीमार न हों।
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किलोई मंडी में टिन-शेड और चहारदीवारी बनवाने के लेकर प्रशासन से संपर्क किया जाएगा। पंचायत के सहयोग से किसानों के हित में मंडी विस्तार और सुविधा के लिए मांग की जाएगी।
-दीपक जांगड़ा, वार्ड-13, पंचायत सदस्य।
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गांव की किलोई अनाज मंडी में आस-पास के गावों के किसान गेहूं बेचते हैं। किसान मंडी पहुंचते हैं लेकिन वहां गेहूं की आवक के अनुसार पर्याप्त स्थान नहीं है। खेतों में गेहूं पड़ा रहता है।
-देवेंद्र, किलोई।
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टिन-शेड व पर्याप्त स्थान हो तो गेहूं को बचाया जा सकता है। अब खुले में गेहूं पड़ा रहता है। यहां बारिश में किसानों और आढ़तियों की दिक्कतें बढ़ जाती है। बारिश में गेहूं बिल्कुल गांठ हो जाता है।
-दिलबाग, किसान, किलोई।
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कच्ची मिट्टी होने के कारण बारिश में गेहूं के नुकसान होने खतरा रहता है। 40 साल से किलोई गेहूं खरीद का केंद्र हैं। गांव में आधुनिक मंडी की आवश्यकता है। खुल आसमान के तले गेहूं पड़ा रहता है।
-रामफल सिंह, समाज सेवी किलोई।
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1999 से किलोई में गेहूं की खरीद चल रही है। आढ़तियों को मंडी में पक्की फंड न होने के कारण खेतों में गेहूं डालना पड़ता है। प्रशासन से मंडी बढ़ाने की मांग कर चुके हैं।
-मुकेश, आढ़ती किलोई।
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25-30 साल से मंडी में गेहूं की आवक होती है। मंडी में सिर्फ 2.5 एकड़ की पक्की फड़ है लेकिन गेहूं की आवक अधिक रहती है। अभी 7.5 लाख मीट्रिक टन की आवक होती है।
-संदीप, आढ़ती, किलोई।
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जब गांव में मंडी आई है तब से ही कोई चहारदीवारी और टिन-शेड नहीं है। बारिश व आंधी में गेहूं का नुकसान होने का खतरा है। तेज हवाओं के उठती धूल गेहूं में जाकर मिल जाती है।
-जोगिंद्र, किलोई।
01-रोहतक की किलोई अनाज मंडी में बिना टीन-शेड और चाहरदीवारी के खुले में पड़ा गेहूं। संवाद
01-रोहतक की किलोई अनाज मंडी में बिना टीन-शेड और चाहरदीवारी के खुले में पड़ा गेहूं। संवाद
01-रोहतक की किलोई अनाज मंडी में बिना टीन-शेड और चाहरदीवारी के खुले में पड़ा गेहूं। संवाद
01-रोहतक की किलोई अनाज मंडी में बिना टीन-शेड और चाहरदीवारी के खुले में पड़ा गेहूं। संवाद
01-रोहतक की किलोई अनाज मंडी में बिना टीन-शेड और चाहरदीवारी के खुले में पड़ा गेहूं। संवाद
01-रोहतक की किलोई अनाज मंडी में बिना टीन-शेड और चाहरदीवारी के खुले में पड़ा गेहूं। संवाद
01-रोहतक की किलोई अनाज मंडी में बिना टीन-शेड और चाहरदीवारी के खुले में पड़ा गेहूं। संवाद