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आरक्षण लागू नहीं होने तक चुप नहीं बैठेंगे जाट

Sat, 04 Jan 2014 09:41 PM IST
रोहतक/ब्यूरो।
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रोहतक में केंद्र में जाटों को ओबीसी की श्रेणी में केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से आरक्षण की सिफारिश करने के बाद, पहले से ओबीसी श्रेणी में आरक्षण का लाभ ले रही जातियों द्वारा इसका विरोध करने के कारण हरियाणा के खाप चौधरियों की भौहें तन गई हैं।
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चौधरियों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द जाटों को आरक्षण देने के लिए अधिसूचना जारी की जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर बसंती पंचमी यानी चार फरवरी के बाद आंदोलन बड़े पैमाने पर शुरू किया जाएगा।

जाट चौधरियों ने कहा कि किस भी जाति को जाट आरक्षण का विरोध नहीं करना चाहिए क्योंकि यह तो केंद्र सरकार को तय करना है कि ओबीसी में किन जातियों को शामिल किया जाए। हरियाणा में जाटों को आरक्षण दिलवाने में खापों की अहम भूमिका रही है।
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सितंबर 2012 में खाप पंचायतों ने जींद के गांव दनौंदा कलां में बैठक करके हरियाणा सरकार को तीन महीने का समय दिया था। हरियाणा सरकार ने समय सीमा में ही 17 दिसंबर 2012 को घोषणा कर दी कि हरियाणा के जाटों को विशेष श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ मिलेगा।

इसके लिए बाकायदा हरियाणा सरकार ने 24 जनवरी 2013 को आरक्षण की व्यवस्था करने के लिए अधिसूचना जारी की। इसके बाद जाटों ने केंद्र सरकार से नौकरियों में आरक्षण की मांग की। खाप पंचायतों व जाट आरक्षण से जुड़े संगठनों ने मार्च 2013 में दिल्ली में बैठक करके केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांग रखी। इसके बाद सितंबर में दिल्ली में जंतर मंतर पर धरना दिया और फिर टिकरी बॉर्डर पर जाम लगाया था।

19 दिसंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जाटों को ओबीसी की श्रेणी में शामिल करने की सिफारिश की है। इसके बाद से ही प्रदेश में जाटों को ओबीसी में आरक्षण देने का विरोध हो रहा है। खाप चौधरियों को इस बात की आशंका है कि कहीं केंद्र सरकार दूसरी जातियों के विरोध के कारण आरक्षण के लिए अधिसूचना जारी करने में आनाकानी न कर दे।

इसके मद्देनजर चौधरियों ने केंद्र सरकार को सर छोटूराम की जयंती (बसंती पंचमी) तक अधिसूचना जारी करने की मांग की है। सर्व जाट सर्वखाप आरक्षण समिति हरियाणा के प्रवक्ता सूबे सिंह समैण ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने बसंती पंचमी तक अधिसूचना जारी नहीं की तो फिर से जाट आंदोलन शुरू किया जाएगा।

जो लोग ओबीसी में जाटों को आरक्षण देने का विरोध कर रहे हैं, वह गलत है। आज तक जाटों ने ओबीसी में शामिल जातियों का विरोध नहीं किया तो फिर उन जातियों को भी जाटों का विरोध नहीं करना चाहिए।
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