लंबे इंतजार के बाद शुरू हुई जाट शिक्षण संस्था की चुनावी प्रक्रिया नामांकन के आखिरी दिन एक बार फिर रुक गई है। संस्था के चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों को एक बार फिर तगड़ा झटका लगा है। संस्था के आजीवन सदस्य की याचिका पर हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया पर फिलहाल स्टे लगा दिया है। याचिकाकर्ता का आरोप था कि संस्था के चुनाव में नियमों का उल्लंघन हो रहा है। बिना पहचान पत्र चुनाव कराए जा रहे हैं, जिसमें भारी धांधली की आशंका है। संस्था चुनाव में नामांकन के आखिरी दिन बृहस्पतिवार को कोर्ट ने चुनाव पर रोक लगा दी। अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। बता दें कि 10 जुलाई को संस्था के 105 कॉलेजियम सदस्यों का चुनाव होना था और इसके बाद सदस्य कार्यकारिणी चुनते।
बोहर गांव निवासी कृष्ण की ओर से दायर याचिका पर एडवोकेट जसबीर मोर ने जस्टिस एम. जयपॉल की बेंच के समक्ष बताया कि जाट एजुकेशन सोसाइटी रोहतक के करीब 15 हजार वोटर हैं। सोसाइटी के नियमों के अनुसार, केवल वही सदस्य वोट डालने का अधिकार रखते हैं, जिनका सोसाइटी ने पहचान पत्र बनाया हो। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोसाइटी के केवल 700 सदस्यों का ही पहचान पत्र बना है। ऐसे में बिना पहचान पत्र वोट डलवाए जाने पर धांधली हो सकती है। आरोप लगाया कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने के 45 दिन बाद चुनाव की तिथि जारी की जाती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया। याची का कहना है कि उन्होंने सोसायटी के समक्ष इस बाबत आपत्ति भी दर्ज कराई, लेकिन इसका कोई सकारात्मक जवाब नही मिला। आग्रह किया कि चुनाव से जुड़ा सारा रिकार्ड समन करते हुए चुनाव पर रोक लगाई जाए। बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट ने चुनाव पर रोक लगा दी।
फरवरी में भी नहीं हो सका था चुनाव
संस्था की गवर्निंग बॉडी पिछले साल अगस्त में भंग कर दी गई थी। चुनाव सालभर बाद भी होने मुश्किल दिख रहे हैं। आपसी फूट के कारण कभी कोई तो कभी कोई रोड़ा अटका देता है। कई माह के इंतजार के बाद फरवरी में चुनाव का शेड्यूल जारी कर दिया गया, लेकिन आरक्षण आंदोलन के चलते शेड्यूल के अनुसार चुनाव नहीं हो सका। इसके बाद 10 जुलाई का शेड्यूल जारी हुआ। जिस तरह इतनी जल्दी चुनाव प्रक्रिया चल रही थी उससे लग रहा था कि इस बार चुनाव हो ही जाएगा, लेकिन अब फिर मामला अटक गया है।
पहचान पत्र को लेकर पहले भी उठे सवाल
जाट संस्था के पहचान पत्रों को लेकर पहले भी कई बार मांग उठ चुकी है। पिछली गवर्निंग बॉडी ने समय पर पहचान पत्र नहीं बनाए। कार्यकाल के आखिर में 15 हजार वोटरों में से मात्र 1500 के ही पहचान पत्र बने थे, लेकिन इस बार प्रशासन ने इतनी जल्दबाजी दिखाई कि पहचान पत्रों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। सवाल यह है कि जिस मुद्दे पर पहले इतना हंगामा हुआ उस पर गंभीरता क्यों नहीं दिखाई गई? यही कारण रहा कि ऐनवक्त पर यह मुद्दा हाईकोर्ट में पहुंच गया। हालांकि वार्डबंदी को लेकर भी पूर्व प्रधान समेत कुछ लोग विरोध कर रहे थे। विरोध के बावजूद नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। अब भी संस्था की वोटर लिस्ट में भारी खामियां बताई जा रही हैं। सूत्रों की मानें तो लोहाखुर्द गांव समेत अन्य कई गांवों में अब भी काफी संख्या में मृत वोटर हैं।
यूं बोले प्रत्याशी
चुनाव के लिए पूरी तैयारी कर ली गई थी, लेकिन जिन मुद्दों पर याचिका डाली गई थी, उनको लेकर पहले ही मांग उठ रही थी। इसके बाद भी प्रशासन ने उसे ठीक कराना उचित नहीं समझा। पूरे चुनाव को लेकर इतनी जल्दबाजी दिखाई गई। अब चुनाव तभी होने देंगे, जब इन सभी खामियाें में सुधार कर दिया जाएगा। आधी-अधूरी तैयारियों के साथ चुनाव नहीं होने देंगे।
- एडवोकेट चंचल नांदल, प्रधान प्रत्याशी
सभी सदस्यों का पहचान पत्र होना चाहिए। अब स्टे लग गया है तो वोटर लिस्ट भी ठीक की जाए। जो भी खामियां है उन्हें दूर किया जाए, तभी चुनाव होना चाहिए।
- राज सिंह नांदल, पूर्व प्रधान व वर्तमान प्रधान पद के प्रत्याशी