दंगों के आरोप में पकड़े गए लोगों की रिहाई की मांग को लेकर एक मई से शुरू हो रहे जेल भरो आंदोलन को लेकर जाट नेता एकजुट नहीं दिख रहे हैं।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष हवा सिंह सांगवान अभी आंदोलन के पक्ष में नहीं हैं। सांगवान बुधवार को रोहतक पुलिस के सामने अपने बयान दर्ज कराने आए थे। मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि पहले यह देखा जाए कि पुलिस ने किस-किस बेकसूर को पकड़ा है। इन बेकसूरों की सूची बनाई जाए। उसके बाद ही वे जेल भरो आंदोलन को अपना समर्थन देंगे। क्योंकि अभी यह पता ही नहीं है कि कौन-कौन गलत पकड़ा गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर जांच एजेंसी या पुलिस का किसी के पास मैसेज आता है तो उसमें सभी को सहयोग करके अपने बयान दर्ज कराने चाहिए। उसका किसी तरह का विरोध नहीं करना चाहिए। क्योंकि जांच में सहयोग करने के बाद ही दूध का दूध और पानी का पानी होगा।
आंदोलन में जाटों ने कुछ नहीं किया
सांगवान ने कहा कि आंदोलन के दौरान जाटों ने कुछ नहीं किया है, बल्कि यह सब कुछ जातीय दंगों में हुआ है। उनको सरकार पर विश्वास है कि पूरा न्याय किया जाएगा। इस मामले में उन्होंने सीएम से मिलकर यह बात भी रखी है कि किसी को बेवजह दबाया नहीं जाए। अगर ऐसा किया गया तो उससे हालात खराब हो जाएंगे। वहीं पुलिस के सबूत दिखाने की बात पर उन्होंने कहा कि यह देखा जाएगा कि सबूत कैसा है, सही है या गलत।
मलिक ने भी खींचे हाथ
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने भी एक मई के जेल भरो आंदोलन से हाथ खींच लिए हैं। उन्होंने कहा कि एक मई का आंदोलन युवाओं का है। हम 10 मई को दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना देंगे। यहां देशभर के जाट नेताओं को बुलाया गया है। अगर सरकार ने 10 मई तक मांग नहीं मानी तो दिल्ली में बड़े आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।