जाट आरक्षण समेत विभिन्न मांगों के संबंध में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर जसिया गांव में अनिश्चितकालीन धरना रविवार से शुरू होगा। धरने के लिए आयोजकों ने पूरी तैयारी की है तो पुलिस-प्रशासन भी मुस्तैद है। आयोजकों का दावा है कि सुबह न्याय रैली होगी, इसके बाद अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो जाएगा। धरने में पांच हजार से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, खाप प्रतिनिधियों और अन्य संघर्ष समितियों ने आंदोलन में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष अशोक बल्हारा ने बताया कि धरना स्थल पर बड़ा टेंट लगा दिया गया है। सुबह 10 बजे धरना स्थल पर लोग पहुंचने शुरू हो जाएंगे। शुरूआत में न्याय रैली होगी, जिसके बाद उसे अनिश्चितकालीन धरने में बदल दिया जाएगा। धरना स्थल पर खाने-पीने और कूलर आदि का बंदोबस्त किया गया है। आंदोलन बुजुर्गों की देखरेख में शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को भी आश्वासन दे दिया गया है कि आंदोलन के दौरान किसी प्रकार की अशांति नहीं होगी।
बशर्ते पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी धरने में हस्तक्षेप न करें। दावा किया जा रहा है कि धरने में पांच हजार से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। इतनी भीड़ को देखते हुए ही धरना स्थल पर बंदोबस्त किया गया है। हालांकि आंदोलन में शामिल होने से खाप प्रतिनिधियों ने इनकार कर दिया है। इसके अलावा अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक राठी और सर्वजातीय सर्वखाप महापंचायत महिला विंग की प्रदेशाध्यक्ष संतोष दहिया समेत अन्य कई समिति भी आंदोलन में शामिल होने से मना कर चुकी हैं। आंदोलन को लेकर पुलिस-प्रशासन मुस्तैद है। शनिवार को भी अधिकारियों ने फोर्स के साथ मिलकर मौका मुआयना किया।
बुजुर्गों की बनाई गई कमेटी
आंदोलन को सफल बनाने के लिए जसिया, रिठाल, घिलौड़, सांघी, टिटौली, मकड़ौली, खिड़वाली और रुड़की आदि गांवों के बुजुर्गों की कमेटी बनाई गई है। कमेटी की देखरेख में धरना दिया जाएगा।
धरना स्थल बदलने के लिए पुलिस-प्रशासन ने बनाया दबाव : मलिक
आंदोलन को लेकर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक का कहना है कि तीन दिन पहले मंत्रियों से बातचीत के बाद प्रदेश भर में धरने के स्थान तय किए गए थे, लेकिन ऐन वक्त पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सभी जगह धरना स्थल बदलवाने के लिए दबाव डालते रहे। अधिकतर ऐसे स्थान बताए गए, जहां धरना देने से जातीय तनाव पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि जाट समाज पुलिस-प्रशासन के दबाव में नहीं आएगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि वह अभी बाहर हैं। जरूरत पड़ेगी तो वह हरियाणा में चलने वाले धरनों में मौके पर भी पहुंचेंगे।
यह बोले खाप नेता
खाप शांति चाहती है। जब तक हाईकोर्ट का फैसला नहीं आता धरना-प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। न ही खाप प्रतिनिधि रविवार को होने वाले आंदोलन में भाग लेंगे।
- हरदीप अहलावत, 84 खाप प्रधान रोहतक
समाज हित की लड़ाई : उपाध्यक्ष
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला उपाध्यक्ष विजयदीप पंघाल का कहना है कि यह समाज हित की लड़ाई है। जो लोग यह कहते हैं कि धरने में शामिल नहीं होंगे, क्या उन्होंने कभी समाज हित के लिए कोई धरना या आंदोलन किया है। ऐसे लोगों से आने वाले समय में समाज खुद जवाब मांग लेगा।