रोहतक। हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसाइटी कर्मचारियों की पिछले एक पखवाड़े से चल रही हड़ताल समाप्त होने के बाद भी पुराने मरीजों को अभी राहत नहीं मिली पा रही है। कर्मचारियों को पिछले 15 दिन में फ्रीज हुए सैंपल की रिपोर्ट तैयार करने व व्यवस्था पटरी पर लाने में कम से कम सात दिन लगेंगे। यही नहीं, सैंपल खराब होने पर मरीज को दोबारा जांच करानी पड़ सकती है।
प्रदेश भर में अगस्त की शुरुआत से इस कर्मचारियों की हड़ताल चल रही थी। यह हड़ताल 17 अगस्त को समाप्त हुई। इसके बाद 18 अगस्त रविवार को कर्मचारियों ने अपना कार्यभार संभाला। सोमवार को रक्षाबंधन पर्व के चलते अवकाश रहा। इस कारण चिकित्सा संस्थानों में भी छुट्टी रही। ऐसे में अब मंगलवार को संस्थान खुलने पर काम शुरू होगा। पिछले करीब एक पखवाड़े का वर्कलोड इन कर्मचारियों के लिए प्राथमिकता पर निपटाना बड़ी चुनौती रहेगी। रोज के नए सैंपल के साथ पुराने सैंपल भी जांचने व रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी निभाते हुए व्यवस्था पटरी लानी होगी। इसके लिए एक सप्ताह का समय लगने की उम्मीद है। इसके बाद ही लैब में काम सामान्य रूप से हो पाएगा।
बता दें कि कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सैकड़ों गर्भस्थ शिशुओं पर एचआईवी संक्रमण का काला साया मंडरा रहा था। एचआईवी पीड़ितों या संभावितों के साथ गर्भवती महिलाओं की भी जांच नहीं हो रही है। पिछले एक पखवाड़े से सैंपल लेकर उनके डी-फ्रीजर में फ्रीज कर किया जा रहा था। इस कारण रिपोर्ट जारी नहीं हो रही थी। अब हड़ताल समाप्त हाेने पर मंगलवार से काम सुचारु होने पर रिपोर्ट मिलने की आस जगी है।
पीजीआई में रोज आ रही 100 गर्भवती
पीजीआई के स्त्री रोग विभाग में ही रोजाना 100 से ज्यादा गर्भवती पहुंच रही हैं। इनकी एचबी समेत विभिन्न जांचों में एचआईवी जांच भी कराई जाती है। पिछले करीब 16 दिनों से संस्थान में यह जांच नहीं हो रही है। हड़़ताल के चलते जांच का काम बंद है। केवल ओपीडी के 99 नंबर कमरे में सैंपल लिए जा रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों के अन्य मरीज अलग हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में मरीज प्रभावित हैं।
कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इसके चलते काम प्रभावित है। इन कर्मचारियों के पास एचआईवी की गंभीर बीमारी के मरीजों की जांच का काम है। इनकी हड़ताल का मरीजों पर सीधे असर पड़ता है। हड़ताल समाप्त होते की कर्मचारी ड्यूटी पर लौट आए हैं। अब प्राथमिकता से सैंपल जांच कर उनकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
राजेंद्र लोहान, प्रधान, हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी।
गर्भवती महिला की एचआईवी जांच जरूरी है। जांच से ही गर्भस्थ शिशु के संक्रमित होने या नहीं होने का पता लगता है। यदि संक्रमण है तो तुरंत उपचार शुरू किया जाता है। संक्रमण का पता लगने पर समय रहते दवा देकर नवजात को सुरक्षित रखा जा सकता है। हड़ताल से यह जांच नहीं हो रही है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
डाॅ. पुष्पा दहिया, अध्यक्ष, स्त्री राेग एवं प्रसूति विभाग, पीजीआईएमएस।