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परिवार से दूर रहकर मरीजों का जीवन बचाने को इबादत मान निभाया फर्ज

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लॉकडाउन में छूट मिलने के साथ ही कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार फैल रहा है। ऐसे में परविार से दूर रह कर डॉक्टर, नर्स, लैब तकनीशियन संक्रमित मरीजों का जीवन बचाने को अपने फर्ज को इबादत की तरह निभा रहे हैं। संक्रमित मरीज जांच से लेकर उनके ठीक होकर घर जाने तक इन्हीं के संपर्क में रहता है। संक्रमित मरीजों के परिवारजन या परिचित वायरस का शिकार न हों इसके लिए उनका मरीज के पास आना प्रतिबंधित होता है।
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जिला अस्पताल की लैब में तैैनात मेडिकल टैक्नोलॉजिस्ट विजय तंवर कोरोना संदिग्ध मरीजों का अप्रैल माह से सैंपल ले रहे हैं। रोजाना 40 से 100 सैंपल लिए जाते हैं। सैंपल लेने के दौरान पीपीई किट में होते हैं, लेकिन संक्रमण फैलने का डर बना रहता है। पहले एक दिन का गैप मिलता था, लेकिन अब मरीजों की तादाद बढ़ने से वह भी बंद हो गया है। इस समय घर जाने के बाद खुद को सैनिटाइज करके ही बच्चों के पास जाते हैं।
पीजीआईएमएस की स्टाफ नर्स मीनाक्षी हुड्डा वार्ड 26 में कोरोना के मरीजों के उपचार में तैनात हैं। कोरोना वार्ड में ड्यूटी करने के बाद प्रशासन ने दो सप्ताह के लिए क्वारंटीन कर दिया। अब घर में बच्चों के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का मैंटेन कर रहे हैं। हालांकि जांच रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। लेकिन खुशी है कोरोना के मरीजों की सेवा के साथ देश सेवा करने का मौका मिला।
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पीजीआईएमएस की स्टाफ नर्स आशा रानी वार्ड 26 में डयूटी करने के बाद अपने परिवार से दूर दो सप्ताह का क्वारंटीन पीरियड पार कर चुकी हैं। अब वह घर पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ रह रही हैं। आशा रानी ने बताया कि नौकरी तो हम हमेशा करते हैं, लेकिन महामारी में नौकरी करना अलग बात है। मुझे गर्व है कि देश सेवा करने का मुझे भी मौका मिला।
पीजीआईएमएस के डॉ. सुरेश सिंघल कोरोना के संक्रमणकाल में मिशाल बने हुए हैं। डॉक्टर ने अपनी सर्जरी करवाने के बावजूद अपनी ड्यूटी नहीं छोड़ी और काम पर लौट आए। एनेस्थीसिया के सीनियर प्रोफेसर होने के अलावा डॉ. सिंघल के पास कोविड अस्पताल के प्रभारी हैं। वह लगातार कोरोना मरीजों का उपचार कर रहे डॉक्टरों व स्टाफ नर्सों को भी सम्मान दे रहे हैं।
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