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सुखविंद्र को हथियार दिलवाने वाला यूपी के पूर्व फौजी की अंतरिम जमानत याचिका खारिज

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जाट कॉलेज अखाड़ा हत्याकांड में पुलिस की जांच पूरी हो गई है। हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुखविंद्र कोच को हथियार दिलवाने के आरोप में गिरफ्तार यूपी के पूर्व फौजी की अदालत ने अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। मनोज मुजफ्फरनगर के गांव राजपुर-छाछपुर का रहने वाला है। उसने कोरोना संक्रमण के दौरान परिवार की देखभाल के लिए अदालत से अंतरिम जमानत मांगी थी। आरोप है कि उसने सुखविंद्र को बिचौलिया बनकर हथियार दिलवाया। हालांकि जिससे हथियार लिया गया, उसको पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है। वहीं, केस की पहली सुनवाई 24 जून को एडीजे की अदालत में होगी।
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सोनीपत जिले के गांव सरगथल निवासी प्रमोज ने 12 फरवरी को पीजीआई थाने में शिकायत दी थी कि उसका भाई मनोज मलिक जाट कॉलेज में डीपी लगा हुआ था। जबकि भाभी साक्षी मलिक रेलवे में नौकरी करती थी। वे दोनों बेटे सरताज के साथ देव कॉलोनी में रहते थे। महिला खिलाड़ी को लेकर मनोज की साथी कोच सुखविंद्र से कहासुनी हो गई थी। इसी रंजिश के चलते सुखविंद्र कोच ने अखाड़े में मनोज मलिक, भाभी साक्षी मलिक, दूसरे कोच सतीश, प्रदीप, मथुरा निवासी महिला खिलाड़ी पूजा की हत्या कर दी। जबकि साथी कोच अमरजीत घायल हो गया। बाद में घायल सरताज ने भी दम तोड़ दिया। पुलिस ने मामले में आरोपी कोच सुखविंद्र को दिल्ली पुलिस की मदद से गिरफ्तार कर लिया था। अप्रैल माह में उसके खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके आधार पर अब अदालत में सुखविंद्र के खिलाफ केस चलेगा।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहली पेशी, वीसी से होगी सुनवाई
पुलिस की ओर से दो माह में ही अप्रैल में अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी। अब चार्जशीट के आधार पर कोर्ट में आरोपी सुखविंद्र पर आरोप तय होंगे। पुलिस की अर्जी पर केस एडीजे डॉ. गगनगीत कौर की फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा, जिस पर 24 जून को पहली सुनवाई होगी। कोरोना संक्रमण के चलते पहली सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से होगी।
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सुखविंद्र के खिलाफ पुख्ता सबूत, लेकिन मनोज के खिलाफ केवल आर्म्स एक्ट
पीड़ित पक्ष के वकील एडवोकेट सुरेश नांदल ने बताया कि पुलिस की ओर से 150 पेज की दाखिल चार्जशीट में 63 गवाह बनाए गए हैं, जिसमें तीन मुख्य गवाह हैं। इसके अलावा 26 पुलिसकर्मी व 14 डॉक्टर भी सूची में शामिल है। सुखविंद्र के खिलाफ तकनीकी सुबूत भी काफी महत्वपूर्ण रहेंगे। वारदात के समय आरोपी के मोबाइल की लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज के अलावा फोरेंसिक जांच रिपोर्ट से भी तय हो गया कि जो गोली मृतकों के शरीर में मिली, वे आरोपी से बरामद पिस्तौल से ही चली हैं। हालांकि मामले में पुलिस ने यूपी के पूर्व फौजी मनोज को भी गिरफ्तार किया है, लेकिन उसके खिलाफ केवल आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है। उसके खिलाफ भी धारा 120बी के तहत आरोप पत्र दाखिल होना चाहिए था।
भाई-भाभी व भतीजे को खोने वाला प्रमोज बोला, फांसी से कम मंजूर नहीं
कोच मनोज मलिक, भाभी साक्षी मलिक व भतीजे सरताज को खोने वाले सरगथल निवासी प्रमोज का कहना है कि पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट अभी पढ़ी नहीं हैं। जल्द चर्चा करने के लिए वकील से मुलाकात करूंगा। आरोपी को फांसी से कम सजा मंजूर नहीं है। अदालत में मजबूती से केस लड़ा जाएगा।
24 जून को एडीजे डॉ. गगनगीत कौर की अदालत में पहली तारीख लगेगी। पिछली तारीख पर कोर्ट में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट में जल्दी-जल्दी सुनवाई होती। हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते पहली सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हो सकती है।
- एडवोकेट सुरेंद्र नांदल, वकील, पीड़ित पक्ष
यूपी के पूर्व फौजी मनोज के खिलाफ केवल इतना आरोप है कि उसने बिचौलिया बनकर सुखविंद्र को हथियार तीसरे व्यक्ति से दिलवाया था। उसने अदालत में अंतरिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। खास बात यह है कि मनोज से कोई रिकवरी भी नहीं है।
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- एडवोकेट कृष्ण कौशिक, पूर्व फौजी मनोज का वकील
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