रोहतक। जिला उपभोक्ता आयोग में बीमा कंपनी हुमायूंपुर गांव निवासी धर्मपाल की मौत को आत्महत्या बताकर क्लेम खारिज कर दिया था। आयोग ने कहा है कि मृतक की पत्नी सुशीला को क्लेम की राशि 3.95 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज सहित दे। 5 हजार रुपये हर्जाने व 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर भी दिए जाएं।
हुमायूंपुर निवासी सुशीला (48) ने मई 2021 में याचिका दायर की थी कि उनके पति धर्मपाल ने 2019 में श्रीराम लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से दो लाख रुपये व मृत्यु होने पर 2,34,924 रुपये का बीमा कराया था। दुर्भाग्यवश तीन फरवरी 2020 में पति का अज्ञात कारणों से निधन हो गया था।
मार्च 2021 में बीमा कंपनी ने पति की मौत को आत्महत्या बताकर क्लेम देने से इन्कार कर दिया था। आखिर में पीड़िता ने आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग के नोटिस में बीमा कंपनी ने जवाब दिया कि धर्मपाल की मौत के कारण के दस्तावेज नहीं हैं।
इसके अलावा, दावा किया कि गांव की सरपंच ने लिखित बयान दिया कि धर्मपाल की मृत्यु आत्महत्या के कारण ही हुई थी। वहीं, एएनएम ने बयान में कहा कि उन्हें धर्मपाल की मृत्यु के सटीक कारण की जानकारी नहीं थी क्योंकि कुछ लोग मृत्यु का कारण हृदयाघात बता रहे थे। अन्य लोग इसे आत्महत्या बता रहे थे।
बीमा कंपनी ऐसा कोई भी दस्तावेज रिकॉर्ड पर नहीं ला सकी कि जिससे साबित हो कि धर्मपाल ने आत्महत्या की है। न तो कोई पोस्टमार्टम रिपोर्ट, न ही कोई दैनिक डायरी रिपोर्ट है और न ही कोई एफआईआर है।
इतना ही नहीं, गांव की सरपंच गीता की तरफ से एक प्रमाण पत्र आयोग में दिया गया था। इसमें बताया गया कि धर्मपाल की मौत का कारण दिल का दौरा बताया गया है। आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद शिकायतकर्ता के पक्ष में निर्णय दिया है।