धारूहेड़ा। बीमा पॉलिसी होने के बावजूद गंभीर बीमारी के इलाज का खर्च देने से इनकार करना आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने प्रसव के करीब दो महीने बाद महिला को हुई गहरी शिरा घनास्रता (डीप वेन थ्रोम्बोसिस-डीवीटी) को प्रसव से जुड़ी जटिलता बताकर इलाज का दावा खारिज करने पर बीमा कंपनी को 5,74,575 रुपये की प्रतिपूर्ति 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करने का आदेश दिया है। आयोग ने मानसिक पीड़ा व उत्पीड़न के लिए 50 हजार और मुकदमे के खर्च के 15 हजार रुपये भी देने के निर्देश दिए हैं। भुगतान आदेश की प्रति मिलने के 45 दिन में करना होगा। देरी पर देय राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगेगा।
मामला गांव खरखड़ा निवासी डब्लू की शिकायत से संबंधित है। उनकी ओर से अधिवक्ता अजय कुमार ने पैरवी की। सुनवाई जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष राजेंदर प्रसाद और सदस्य श्रीनिवास खुंडिया की पीठ के समक्ष हुई।
शिकायतकर्ता ने पत्नी सरिता और पुत्र के नाम से आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस की सक्रिय स्वास्थ्य प्लेटिनम-वर्धित पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। छह लाख रुपये की बीमा राशि वाली पॉलिसी 17 जुलाई 2023 से 16 जुलाई 2024 तक वैध थी। एक अक्टूबर 2023 को सरिता के बाएं पैर में गंभीर सूजन और दर्द हुआ। जांच में डीवीटी की पुष्टि हुई और उन्हें गुरुग्राम के अस्पताल में भर्ती कराया गया। नकद रहित उपचार की अनुमति नहीं मिलने पर परिवार ने 1,64,670 रुपये खर्च किए।
उसी दिन सरिता को नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार व शल्य चिकित्सा पर 3,77,418 रुपये तथा दवाइयों पर 32,487 रुपये खर्च हुए। बीमा कंपनी ने आठ अक्टूबर को दावा फिर खारिज कर दिया। कंपनी ने बीमारी को करीब दो माह पहले हुए प्रसव और शल्य चिकित्सा से जुड़ी जटिलता बताया।
आयोग के समक्ष सर गंगाराम अस्पताल के रक्तवाहिका शल्य चिकित्सक डॉ. अपूर्व श्रीवास्तव का प्रमाणपत्र पेश किया गया। इसमें डीवीटी का प्रसव या प्रसव संबंधी शल्य चिकित्सा से कोई संबंध नहीं होने और बीमारी का कारण अज्ञात होने की पुष्टि की गई। इसी चिकित्सकीय साक्ष्य के आधार पर आयोग ने बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश दिया।