रोहतक। जिला प्रशासन ने उच्च शिक्षा में परिवर्तन की पहल करते हुए सरकारी एवं निजी कॉलेजों को शिक्षण, प्रशिक्षण व छात्र सहभागिता को वास्तविक बाजार और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने के निर्देश दिए हैं।
उपायुत्त सचिन गुप्ता ने स्थानीय लघु सचिवालय स्थित सभागार में कॉलेजों एवं औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के प्राचार्यों के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान युवाओं को उभरते रोजगार एवं प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार करने के लिए कौशल केंद्रित और परिणाम आधारित शिक्षण पर बल दिया।
उपायुक्त ने कॉलेजों को निर्देश दिए कि वे अंतिम वर्ष के पाठ्यक्रम में प्रत्येक छात्र के लिए आवश्यक तीन मूल कौशल क्षेत्रों को शामिल करें। इनमें संचार कौशल, सार्वजनिक भाषण के तहत हिंदी व अंग्रेजी दोनों पर ध्यान देकर युवाओं में प्रभावी ढंग से विचार प्रस्तुत करने की क्षमता विकसित की तैयारी शामिल है। कौशल डिजिटल साक्षरता एवं बुनियादी आईटी कौशल के तहत विद्यार्थियों का कंप्यूटर करना है।
कौशल समस्या समाधान एवं व्यावहारिक अनुभव के तहत गतिविधि आधारित शिक्षण, केस डिस्कशन व फील्ड कार्य के अलावा तार्किक सोच, टीमवर्क और वास्तविक दुनिया से जुड़ाव को प्रोत्साहन दिया जाएगा। उन्होंने कॉलेजों को निर्देश दिए कि वे यूपीएससी, एचसीएस, बैंकिंग, रक्षा, रेलवे, एसएससी, पुलिस आदि क्षेत्रों के लिए रुचि आधारित छात्र समूह बनाएं।
प्रशासनिक सहयोग से कॉलेजों को वर्तमान उद्योग अपेक्षाओं की समझ, शिक्षण गुणवत्ता में सुधार, व्याख्यान एवं जागरूकता सत्रों का आयोजन व छात्र परिणामों एवं कौशल प्रगति के आकलन में सहायता मिलेगी। आईटीआई को जिला जेल के भीतर व्यवसाय एवं कौशल आधारित व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने के निर्देश भी दिए।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. फूल सिंह, डॉ. संतोष, सहायक प्रो. डॉ. हर्ष नांदल, नरेश चंद्र, संदीप कुमार, डॉ. कविता रानी, रेनू, कंवलजीत कौर, बबीता, शिल्पी व अन्य उपस्थित रहे।