शहर में कई दिनों से पानी का संकट बना हुआ है। लोगों को जहां-तहां से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है या पानी का टैंकर मंगवाकर काम चलाना पड़ रहा है। स्थिति इतनी भयावह हो गई है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सोनीपत स्थित जल घर की मछलियां बिना पानी के मर रही हैं। इस स्थिति के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग सिंचाई विभाग को दोषी ठहरा रहा है।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिना बताए नहर का पानी बंद कर दिया गया। इससे जल घरों में पानी का संकट खड़ा हो गया है। इस वजह से कई इलाकों में एक समय पानी की आपूर्ति की जा रही है। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि एक दो दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी। लेकिन मरी हुई मछलियां कैसे जिंदा होंगी, इसका जवाब उनके पास नहीं है।
शहर पिछले कई दिनों से पेयजल को तरस रहा है। इस लाचारी का खामियाजा सबसे पहले बेजुबान मछलियों को उठाना पड़ा है। सोनीपत स्टैंड स्थित जल घर के वाटर टैंक में नहरी पानी को साफ करने वाली कई मछलियों ने पानी के अभाव में दम तोड़ दिया है। हैरानी की बात तो यह है कि मरी हुई मछलियों को टैंक से निकालना तो दूर, विभाग को इसकी खबर तक नहीं है। लोगों की तरह मछलियों की समस्या को देखने और समझने की किसी अधिकारी और कर्मचारी ने कोशिश नहीं की।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के पास इतना पानी स्टाक में तो है कि वे वीवीआईपी के घर टैंकर भिजवा सकें या आपात स्थिति में दमकल को पानी दे सकें। लेकिन जल घर के टैंक में इतना पानी नहीं रखा कि मछलियों को जिंदा रखा जा सके। लोगों ने रोष जताते हुए कहा कि वे मछलियों को आटे की गोलियां डालते थे, लेकिन विभाग ने न तो सप्लाई के पानी की व्यवस्था की और न मछलियों के जीवन की ओर ध्यान दिया। लोगों का कहना है कि जब कार्यालय में कोई अधिकारी बैठे तो उन्हें हकीकत का पता चले।
आज सुबह सामान्य हो जाएगी आपूर्ति
प्रयास है कि दीपावली को दोनों समय पानी दिया जाए। इसके लिए कुछ पानी कनैहली हैड पर पहुंच गया है। इसके अलावा दो पंप लगातार चलाए जा रहे हैं। अभी टैंक में पानी है, इसलिए मछलियां नहीं मरेंगी। मछलियां पानी में सफाई का काम करती हैं। पानी की समस्या सिंचाई विभाग की वजह से आई है।
इस बार तीन दिन का क्लोजर बढ़ा दिया और पहले इसकी जानकारी नहीं दी। यदि हमें जानकारी होती तो इंतजाम कर लेते। अब विभाग से रिक्वेस्ट कर पानी छुड़वाया है, उम्मीद है रविवार सुबह तक सप्लाई सामान्य हो जाएगी।
- जेके मुटनेजा, एसडीई, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग