रोहतक। कोविड-19 का संक्रमण रोकने को देश भर में लॉकडाउन किया गया है। प्रशासन संक्रमण रोकने को हर तरह की जद्दोजहद में लगा हुआ है। बहुत से मजदूर और प्रवासी लॉकडाउन के चलते फंस गए हैं। जिले की तमाम समाजसेवी संस्थाएं उनकी मदद में जुटी हैं। इस सबके बावजूद कुछ लोगों ने इसी लॉकडाउन में अपने निजी और व्यापारिक हित साधने का मौका भी नजर आ रहा है।
इंडस इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के दो मोबाइल टावर नगर निगम ने पांच महीने पहले अनियमितताओं के कारण सील कर दिए थे। लॉकडाउन के दौरान कंपनी अधिकारी लोगों के हित में टावरों की डी-सीलिंग करवाने की अपील लेकर जिला उपायुक्त के पास पहुंचे। उनकी दलील थी कि लॉकडाउन में सभी लोग घरों में हैं, जिन्हें मोबाइल नेटवर्क की जरूरत है। बहुत से लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं, उन्हें भी नेटवर्क चाहिए। इसलिए जब तक लॉकडाउन चल रहा है, तब तक ही सही उनके दोनों टावरों की डी-सीलिंग की इजाजत दे दी जाए। डीसी वर्मा ने उन्हें लिखित रूप से आवेदन देने को कहा है। कंपनी के एस्टेट मैनेजर सरवर आलम और क्लस्टर मैनेजर रिशुपाल ने बताया कि उनकी कंपनी अपने टावरों के जरिये कई मोबाइल कंपनी के उपभोक्ताओं को नेटवर्क उपलब्ध करवाती है। उनके सुभाष नगर और सेक्टर सात में दो टावर लगे थे। नगर निगम ने करीब पांच माह पहले दोनों सील कर दिए थे। क्योंकि निर्धारित एक लाख रुपये फीस नहीं जमा थी, कुछ औपचारिकताएं भी बकाया थी। कंपनी ने दलील दी कि प्रक्रिया चल रही है, लेकिन निगम नहीं माना। कंपनी के अधिकारियों ने उपायुक्त से अपील की कि फिलहाल लॉक डाउन तक टावरों की डी-सीलिंग के आदेश दे दें, तब तक फीस जमा करवा दी जाएगी।
फूड पैकेट बांटने की आड़ में चाहिए वाहन पास
जिला प्रशासन के पास ऐसे भी मामले आए हैं कि लोगों ने फूड पैकेट बांटने की आड़ में वाहन पास का जुगाड़ करने की कोशिश की। दो व्यक्तियों ने डीसी कार्यालय में आवेदन देकर दिन में सौ कुक्ड फूड पैकेट बांटने की इच्छा जताई। लेकिन इस दौरान उनकी असली मंशा सामने आ गई। बातों-बातों में ही उन्होंने कहा कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में खाना बांटना है और ये लॉकडाउन अभी लंबा चलना है। इस काम में कम से कम पांच वाहनों की जरूरत पड़ेगी। फिलहाल 14 अप्रैल तक उनकी परमिशन दे दी जाए। लेकिन प्रशासन ने यह कह कर साफ इनकार कर दिया कि शहर की दो प्रमुख समाजसेवी संस्थाओं को इसकी अनुमति दी गई है।
मोबाइल टावर कंपनी के लोग लॉकडाउन की दलील देकर टावरों की डी-सीलिंग की मांग को लेकर आए थे। लिखित आवेदन आने के बाद ही उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। खाना बांटने के नाम पर बेवजह किसी को भी वाहन की परमिशन नहीं दी जाएगी।
- आरएस वर्मा, डीसी, रोहतक