रोहतक। नगर निगम सीमा ही नहीं जिले में महम, सांपला, कलानौर क्षेत्र में भी अवैध कॉलोनियां लगातार विकसित हो रही हैं। बिल्डर मनमर्जी से अपना लेआउट प्लान बनाकर यहां प्लॉटों की बिक्री कर रहे हैं। मोबाइल के माध्यम से इनकी मार्केटिंग हो रही है और सस्ते एवं आसान किस्तों पर प्लॉट उपलब्ध कराने के उपभोक्ताओं को ऑफर दिए जा रहे हैं। यही वजह है कि खरीदार इनके झांसे में आ रहे हैं और अवैध प्लॉटों की खरीद रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर नगर निगम, डीटीपी व प्रशासन सप्ताह में दो से तीन बार तोड़फोड़ अभियान चला कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर देते हैं।
जिला प्रशासन की ओर से सख्त आदेश हैं कि कहीं भी अवैध कॉलानी विकसित नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद साठगांठ से बेधड़क अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं। जिला प्रशासन, निगमायुक्त, डीटीपी व भवन अनुज्ञा शाखा नियमित रूप से इन पर कार्रवाई नहीं करते। अवैध कॉलोनियों को काटने वालों पर एफआईआर दर्ज कराए जाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कुछ लोगों पर ही एफआईआर दर्ज करवा कर बात दबा दी जाती है।
प्रति माह 20 से 25 छोटी-बड़ी काटी जा रहीं अवैध कॉलोनियां
जिले में प्रति माह औसतन 20 से 25 छोटी-बड़ी अवैध कॉलोनियां काटी जाती हैं। इनमें पांच हजार से दस हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से जमीन बेची जाती है। इसमें बिल्डर सीवर डलवाने, बिजली की लाइन देने व सड़क बना कर देने का दावा करते हैं। जबकि बाद में इन्हीं वादों पर खरीदारों से विवाद होता है।
निगम व प्रशासन नहीं करते कार्रवाई
जिला प्रशासन की ओर से पटवारी, तहसीलदार, डीटीपी सहित नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा के अधिकारी आदि की जिम्मेदारी होती है कि अवैध कॉलोनियों को विकसित न होने दें। टीएंडसीपी व रेरा पर भी अवैध तौर पर विकसित कॉलोनियों की मॉनीटरिंग कर नोटिस देने व कार्रवाई करने की जिम्मेदारी होती है, लेकिन ऐसा होता नहीं है।
अवैध कॉलोनी से यह होता है नुकसान
बिल्डरों द्वारा शहर में काटी जा रही अवैध कॉलोनी से अधोसंरचना विकसित नहीं हो पाती। यहां घर बनाने वालों को बाद में बिजली-पानी, सीवर, सड़क सहित अन्य दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नगर निगम, बैंक व अन्य कोई निर्माण एजेंसी यहां काम करने के लिए कोई भी राशि उपलब्ध नहीं करवाती। यहां सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं होते।
वर्जन-
अवैध कॉलोनी काटने पर सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। 110 के करीब कॉलोनियों को वैध करने की फाइल आई हैं। इसके अलावा जहां भी अवैध प्लॉट काटे जा रहे हैं, वहां हम तोड़फोड़ करते हैं। विभाग सप्ताह में दो से तीन बार तोड़फोड़ अभियान चलाता है। लगातार लोगों से अपील की जाती है कि वह विभाग से पूछकर ही जमीन खरीदें।
- राजकीर्ति, डीटीपी