परिवार वालों से दूर रहकर सीमा पर दुश्मनों से लड़ने वाले सेना के जवानों को घर आकर सिस्टम से भी लड़ना पड़ता है। इसका एक उदाहरण भर हैं सेक्टर एक निवासी सेना से सेवानिवृत्त प्रदीप सिंह। पिछले पांच सालों से व्यवस्था से लड़ते हुए वह सेवानिवृत्त भी हो गए, लेकिन उनकी जंग खत्म नहीं हुई। सिस्टम की वजह से पहले तो वह कर्जदार हुए, फिर जमीन गिरवी रखनी पड़ी। रक्षा मंत्रालय से लेकर पीएमओ तक गुहार लगाई, लेकिन स्वीकृति के बावजूद उनकी राशि नहीं मिल पाई।
मूलरूप से झज्जर जिले के शेरिया गांव निवासी प्रदीप सिंह इस समय रोहतक के सेक्टर एक में रहते हैं। प्रदीप सिंह सेना में नायक के पद पर तैनात थे। देश की रक्षा के लिए कई जगह तैनात रहे। साल 2011 में उनकी नागालैंड के दीमापुर में ड्यूटी थी। प्रदीप सिंह 29 जनवरी-2011 से 2 मार्च 2011 तक की छुट्टी लेकर घर आ रहे थे। चार फरवरी को दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो उनकी तबीयत बिगड़ गई। लोगों ने उनको एक प्राइवेट हास्पिटल में भर्ती कराया तो दिल की बीमारी बताई गई। वह हास्पिटल में 12 फरवरी तक भर्ती रहे।
इसके बाद प्रदीप सिंह ने उपचार में खर्च हुए 3 लाख 7 हजार 624 रुपये के बिल को भुगतान के लिए सेना कार्यालय में लगा दिया, लेकिन इसका भुगतान सेना की तरफ से आज तक नहीं किया गया। प्रदीप सिंह का कहना है कि उनके उपचार के लिए परिजनों ने कर्ज लेकर अस्पताल को भुगतान किया था। इसी बीच प्रदीप सिंह एक मई-2012 को सेवानिवृत्त हो गये। इसके बाद भी वह उपचार का रुपया लेने के लिए सिस्टम से लड़ते रहे। जब सेना की ओर से उपचार के बिल का भुगतान नहीं किया गया तो कर्ज उतारने के लिए उन्हें अपनी जमीन गिरवी रखनी पड़ी। इसके बाद प्रदीप सिंह ने सरकारी विभागों के बारे में जानकारी रखने वाले सेक्टर तीन में रहने वाले ताऊ उम्मेद सिंह से संपर्क किया।
ताऊ ने रक्षा मंत्रालय से संपर्क किया तो 19 जनवरी 2015 में उनके 2 लाख 88 हजार 325 रुपये की स्वीकृति कर दी गई। साथ ही रुपये जल्द ही पहुंचने की बात कही गई। लेकिन पैसे आज तक नहीं मिले। इस बीच वह रक्षा मंत्रालय से लेकर पीएमओ तक को इस बारे में पत्र लिख चुके हैं।
अब चिकनगुनिया की चपेट में
अपनी पहली बीमारी के भुगतान को लिए गए कर्ज को उतारने के लिए सिस्टम से लड़ने वाले प्रदीप सिंह अब चिकनगुनिया की चपेट में आ गए हैं। इस समय वह हास्पिटल में बीमारी से जूझ रहे हैं। जिंदगी में बीमारियों के कारण परेशानी झेलने वाले पूर्व फौजी की परेशानी सरकार भी कम नहीं कर रही है।
ताऊ ने पूर्व फौजी की समस्या को अपना बनाया
सेक्टर तीन में रहने वाले ताऊ उम्मेद सिंह को जब रिटायर्ड फौजी प्रदीप सिंह की समस्या के बारे में पता चला तो उन्होंने उसे अपनी समस्या बना लिया। प्रदीप सिंह को दिल की बीमारी थी इस कारण उन्हें भागदौड़ करने में परेशानी होती है। इसी वजह से ताऊ उम्मेद सिंह खुद रक्षा लेखा नियंत्रक से लेकर रक्षा मंत्रालय और पीएमओ तक पत्र व्यवहार करते हैं। ताऊ किसी भी तरह रिटायर्ड फौजी के लाखों रुपये दिलाने में लगे हैं।