रोहतक में बीते 23 अप्रैल को सड़क हादसे में मारे गए दो थानेदारों के परिवारों को अब न्याय की उम्मीद जगी है।
एएसआई अजीत सिंह और बल्लू राम की मौत के मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने राज्य परिवहन आयुक्त के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार पर तल्ख टिप्पणी की है।
आयोग ने परिवहन आयुक्त की ओर से नोटिस का जवाब देने की बजाय दिए जा रहे तर्कों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। आयुक्त को 30 अक्तूबर तक मृतकों के परिजनों के लिए तय मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं।
साथ ही घटनास्थल पर मदद नहीं करने वाले लोगों पर कार्रवाई का पूरा ब्योरा देने को भी कहा है। इस बार ऐसा नहीं करने पर आयोग मानवाधिकार एक्ट 1993 की धारा 18 के तरहत परिवहन आयुक्त को पेश होने के आदेश जारी करेगा।
आयोग के चेयरमैन जस्टिस विजेंदर जैन और सदस्य जस्टिस जेएस भल्ला ने उक्त मामले में नोटिस जारी करते हुए सवाल उठाए कि आखिर प्राधिकरण का इतना ढुलमुल रवैया क्यों है। आयोग ने गत 24 अप्रैल को इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए परिवहन विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस जारी किया था। आयुक्त ने आयोग को भेजे पत्र में कहा कि हम रोहतक के एसपी से जवाब का इंतजार कर रहे हैं, उसके बाद ही आयोग को वे जवाब दे सकेंगे।
उधर, डीआईजी ट्रैफिक एंड हाईवे (एच) करनाल ने आयोग को तय समय में अपना जवाब पेश कर दिया। खास बात यह रही कि आयोग ने डीआईजी के जवाब की प्रति परिवहन आयुक्त को भेजकर फिर जवाब देने को कहा। इसके बाद भी परिवहन आयुक्त ने यही जवाब दिया कि हम एसपी रोहतक की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। आयोग ने फिर से परिवहन आयुक्त को निर्देश दिए कि वे बताएं कि परिवहन विभाग प्रदेश की सड़कों पर ओवरलोडेड ट्रकों, ट्रालों और ट्रैक्टरों की रोकथाम के लिए क्या कर रहा है। इसका भी जवाब नहीं आने के बाद बृहस्पतिवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान आयोग के चेयरमैन और सदस्यों ने परिवहन आयुक्त को 30 अक्तूबर तक मृतकों के परिजनों के लिए तय मुआवजा राशि का ब्योरा देने को भी कहा है।
ये है मामला
शहर के दिल्ली बाईपास पर बीते 23 अप्रैल को लकड़ी से भरा एक ओवरलोडेड ट्राला दो कारों पर पलट गया था। हादसे में खरावड़ चौकी इंचार्ज एएसआई बल्लू राम और सांपला थाने में अतिरिक्त एसएचओ एसआई अजित सिंह की मौत हो गई थी। दोनों कार में सवार होकर रोहतक से सांपला की ओर लौट रहे थे। अजीत सिंह झज्जर जिले के सिलाना गांव के रहने वाले थे और बल्लू राम बांस गांव के रहने वाले थे। मामला अखबारों में सुर्खियां बनने के बाद राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए परिवहन विभाग और पुलिस से ओवरलोडेड वाहनों पर रोक नहीं लगा पाने पर जवाब तलब किया था।