भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार के समय अधिग्रहित जमीनों और आवंटित प्लाटों को कोर्ट से रद्द करने के मामले को सरकार ने गंभीरता से लिया है। प्रदेश सरकार अपने स्तर से ऐसी जमीनों की जांच कराएगी, जिसमें रोहतक के नई आईडीसी के प्लाट आवंटन और सन सिटी का भूमि अधिग्रहण भी शामिल है। सरकार अपनी जांच में देखना चाहती है कि जमीन अधिग्रहण से लेकर प्लाट आवंटन तक में किस तरह के खेल किया गया है। मामले में किसने लापरवाही बरती और किस तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप रहा। सभी पहलुओं की जांच करके आवंटन और अधिग्रहण में खेल करने वालों पर शिकंजा कसा जा सकता है।
कांग्रेस सरकार के समय के कई जमीनों के मामले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। इनमें रोहतक के नई आईडीसी में प्लाट आवंटन और दिल्ली रोड पर हुडा के सेक्टर बनाने के लिए अधिग्रहित जमीन को सन सिटी को देने का मामला भी शामिल है। इनके अलावा भी प्रदेश के जमीन अधिग्रहण और प्लाट आवंटन से संबंधित कुछ मामले कोर्ट में चल रहे हैं। लेकिन नई आईडीसी के प्लाट आवंटन में गड़बड़ी की बात कहते हुए हाईकोर्ट से उसे रद्द किया जा चुका है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। वहीं, हुडा के सेक्टर के लिए अधिग्रहित जमीन को प्राइवेट बिल्डर सन सिटी को देने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताते हुए अधिग्रहण रद्द कर दिया था।
दोनों ही मामलों की सरकार अपनी ओर से जांच कराने में लगी है। वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु का कहना है कि सरकार यह देखना चाहती है कि प्लाट आवंटन और जमीन अधिग्रहण में किस तरह के खेल किए गए। उनमें कौन-कौन अफसर शामिल रहे और राजनीतिक हस्तक्षेप किस तरह से रहा है। कैप्टन का कहना है कि पिछली सरकार में जमीन आवंटन करने में बड़ा खेल किया गया है, जिसका नुकसान आम जनता को हुआ है। उन्होंने सन सिटी के जमीन अधिग्रहण का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी ने हाईकोर्ट में मामला डाला तो कांग्रेस सरकार ने वहां भी गलत जानकारी पेश की। भाजपा सरकार में किसी तरह की गड़बड़ नहीं होने दी जाएगी। जितने भी मामले कोर्ट से रद्द हो रहे हैं, उनमें जल्द जांच कराई जाएगी।