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होम्योपैथी की 5 हजार दवाएं, अस्पताल में उपलब्ध मात्र 180

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सूबे के स्वास्थ्य केंद्रों में एलोपैथी के अलावा आयुष विभाग के माध्यम से मरीजों को आयुर्वेद व होम्योपैथी उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
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लेकिन ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आयुष विभाग आयुर्वेद और होम्योपैथी में फर्क कर रहा है। इसका खामियाजा होम्योपैथी का लाभ ले रहे मरीजों को उठाना पड़ रहा है।

सामान्य अस्पताल में होम्योपैथी पद्धति से उपचार पाने के लिए करीब 100 से 150 मरीज पहुंचते हैं। होम्योपैथी विद्या के अनुसार 5 हजार के करीब दवाएं मरीजों के उपचार के लिए उपलब्ध हैं, जबकि अस्पताल में 180 के करीब ही दवाएं हैं।
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इसमें से भी 20 से 25 दवाएं अकसर कम ही रहती हैं। हाल ही में नौबत यहां तक पहुंच गई थी कि होम्योपैथी विभाग के पास मरीजों को दवा देने के लिए ग्लोब्यूस (मीठी गोलियां) ही उपलब्ध नहीं थीं। इसके लिए जब आयुष विभाग से डिमांड की गई तो बजट न होने की बात कहकर हाथ खडे़ कर दिए गए। वहीं, सूत्रों का दावा है कि आयुष विभाग आयुर्वेद की दवाएं व स्टाफ को पूरा रखता है, जबकि इनके मरीज कम ही हैं।

अमर उजाला इम्पैक्ट
स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से खरीदी 10 हजार की दवा
रोहतक। सामान्य अस्पताल के होम्योपैथी विभाग में मुख्य रूप से प्रयोग होने वाले ग्लोब्यूस (मीठी गोलियां) खत्म हो गईं थीं। इस समस्या को अमर उजाला ने 26 जुलाई के अंक में प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद सीएमओ डॉ. शिव कुमार व सामान्य अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्र के सहयोग से होम्योपैथी विभाग को दस हजार रुपये की दवा उपलब्ध कराई गई।
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होम्योपैथी डॉ. अरविंदम रॉय से सीधी बातचीत
सवाल : होम्योपैथी के मरीजों को सारी दवा अस्पताल में क्यों नहीं मिल पाती?
जवाब : सभी दवाएं हमारे पास उपलब्ध नहीं हैं, अधिकारियों को डिमांड भेजी गई है।
सवाल : ग्लोब्यूस (मीठी गोलियां) व प्लास्टिक की डिब्बी तक नहीं होती आपके पास?
जवाब : नहीं, अभी एमएस व सीएमओ के सहयोग से दस हजार की लोकल खरीद हुई है। अब मरीजों को दवा दी जा रही है।
सवाल : मरीजों का कहना है कि कुछ दवा बाहर की लिखी जाती है?
जवाब : चर्म रोग की दवा एलोपैथी द्वारा 1500 से 2000 की लिखी जाती है। जबकि होम्योपैथी में वहीं उपचार 100 से 200 रुपये में हो जाता है। कुछ दवा हमारे पास उपलब्ध नहीं होती, इसलिए लिखते हैं। लेकिन इसमें मरीजों को कोई समस्या नहीं है।
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