स्वास्थ्य मंत्री अपने दो दिवसीय दौरे में पीजीआई की व्यवस्थाओं का पोस्टमार्टम कर गए।
बृहस्पतिवार सुबह वे पीजीआई में शोपीस बने ट्रामा सेंटर का दौरा करने पहुंचे और कुछ मिनट में ही दर्जनभर खामियां गिनवा दीं।
सेंटर में ओपीडी और टॉयलेट में ज्यादा दूरी होने पर मंत्री अफसरों पर भड़क गए।
निर्माण मंजूरी देने वाले आर्किटेक्चर पर सवाल उठाते हुए मंत्री ने पूछा कि क्या अब मरीज का उपचार हिंदुस्तान में होगा और शौच के लिए उसे पाकिस्तान जाना पडे़गा।
उन्होंने हेल्थ विवि के वीसी, पीडब्ल्यूडी बीएंडआर के चीफ इंजीनियर व स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, महानिदेशक की तत्काल चंडीगढ़ में बैठक बुलाने के निर्देश जारी किए हैं।
ट्रामा सेंटर गलत योजना का परिणाम
मंत्री ने कहा कि ट्रामा सेंटर पूरी तरह से गलत योजना का परिणाम है। क्योंकि जब भी कोई परियोजना बनाई जाती है तो उसकेे साथ ही वहां के लिए जरूरी कर्मचारियों व अधिकारियों सहित उपकरणों का भी खाका तैयार किया जाता है। 2008 में शुरू हुए ट्रामा सेंटर को दो साल में पूरा किया जाना था, लेकिन 5 साल में तो सिर्फ लोक निर्माण विभाग का काम ही पूरा हुआ है। कर्मियों और उपकरणों के बारे में तो सोचा ही नहीं गया। नए वीसी डॉ. कालरा ने अब यहां की मैन पावर व उपकरणों के मामले में संज्ञान लिया है और प्रस्ताव सरकार के पास भेजा है। जनता का पैसा मरीजों के काम नहीं आ पा रहा है। अब ट्रामा सेंटर में गैस पाइपलाइन का काम किया जा रहा है।
मरीज फिसलेंगे तो क्या करोगो
मंत्री ने भवन में लगी लिफ्टों का निरीक्षण किया और आधे अधूरे काम पर नाराजगी जताई। रैंप पर सवाल उठाते हुए पूछा बारिश में मरीज फिसलेंगे तो क्या होगा। इसके लिए क्या व्यवस्था की गई है।
पूर्व मंत्री का गृह जिला, फिर भी हड़बड़ी
मंत्री ने कहा कि मैं हैरान हूं, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र होेने के बावजूद ट्रामा सेंटर का काम इतनी हड़बड़ी में हुआ। मौके पर पूछे जाने पर बताया गया कि एजेंसी बदलने की वजह से देरी हो रही है। एक एजेंसी को डिफाल्टर भी घोषित किया गया है।
इन तथ्यों पर बोले मंत्री
- पीजीआई में एंबुलेंस आने के लिए एमडीयू के रास्ते का तलाशा जाएगा विकल्प। हेल्थ विवि के कुलपति एमडीयू के कुलपति से करेंगे बातचीत।
- पिछले पांच-छह महीनों के दौरान अस्पतालों की कार्यशैली में आया काफी बदलाव। विभाग लिंग जांच करने वालों के खिलाफ कर रहा है कार्रवाई।
- प्रदेश में 761 चिकित्सकों की भर्ती के लिए चल रहे हैं साक्षात्कार। 100 डेंटल सर्जन और लगभग 2800 पैरा मेडिकल स्टाफ की भर्ती शुरू।
- प्रदेश के पांच जिलों में अस्पतालों को मिलेगी पैथ लैब, पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में होगा काम। जिला अस्पताल में एमआरआई, सीटी स्कैन व डायलिसिस की मशीन होंगी उपलब्ध।
- चिकित्सकोें की रिपोर्ट तैयार होगी, इसमें उपचार किए गए व रेफर किए गए मरीजों की जानकारी होगी।
- अस्पतालों के आपातकालीन वार्डों को इस काबिल बनाने की कोशिश है कि वहां आने वाले मरीज का इलाज ठीक तरह हो, जिससे मरीज को मौके पर स्टेबल किया जा सके।