सूबे की सेहत का जिम्मेदार अब स्वास्थ्य विभाग भी नहीं है। क्योंकि खाद्य एवं पेय पदार्थों का सैंपल भरने एवं जांच करने का अधिकार फिलहाल किसी भी सिविल सर्जन के पास नहीं है। यह अधिकार विभाग के अधिकारियों की ढिलाई के चलते 3 सितंबर के बाद से सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारी खो चुके हैं।
फूड सेफ्टी अधिकारी की कमी झेल रहे स्वास्थ्य विभाग के लिए त्योहारी सीजन में एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। इन दिनों मिलावट का धंधा जोरों पर होता है, ऐसे में जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास अधिकार ही नहीं है। सूत्रों की मानें तो विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने समय पर केंद्र सरकार से इसकी अनुमति का नवीकरण नहीं कराया। इसका खामियाजा जहां आम लोगों को उठाना पडे़गा, वहीं मिलावट खोर अपनी मनमर्जी चला सकेंगे। दीपावली को लेकर सूबे के शहर में लाखों क्विंटल मिठाइयां गोदाम में बनकर तैयार हैं। इसके अलावा नकली दूध एवं इससे बनने वाली मिठाइयों की भी पर्व पर बिक्री होगी। लेकिन आमजन के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करने का अधिकार इस बार स्वास्थ्य अधिकारियों के पास भी नहीं है।
हर साल कराना होता है नवीनीकरण
स्वास्थ्य विभाग को खाद्य एवं पेय पदार्थों के सैंपल भरने और जांच कराने का अधिकार केंद्र सरकार की ओर से मिलता है। इसके लिए हर जिले के सिविल सर्जन को अधिकारी के रूप में अधिकृत किया जाता है। इस अधिकार का नवीनीकरण हर वर्ष राज्य सरकार को केंद्र सरकार से कराना होता है। इसकी अनुमति मिलने के बाद स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देशन में ही टीम छापामारी करती है।
नकली दूध के वीडियो से हड़कंप
सोशल मीडिया पर नकली दूध बनाने के वीडियो से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। लेकिन सैंपल भरने की अनुमति नहीं होने के चलते अधिकारी शांत बैठे हैं। विभाग का कहना है कि यदि वे जांच कार्रवाई करते हैं तो आगे किस अधिकार के तहत मामला कोर्ट में पेश करेंगे। यह वीडियो राज्य के कई सिविल सर्जन के मोबाइल तक पहुंच गया है।
नियमों को ताक पर रखकर कार्रवाई नहीं
हम नियमों को ताक पर रखकर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। यदि पुलिस इस संबंध में कोई कार्रवाई करती है या कोई शिकायत आती है तो हम सैंपल करवाते हैं। इसके अलावा हमें अपने स्तर पर फिलहाल जांच का अधिकार नहीं है। जैसे ही केंद्र सरकार से इसकी अप्रूवल आ जाएगी, हमारे डॉक्टर और स्टाफ अपना कार्य शुरू कर देंगे। इस समस्या से विभाग के शीर्ष अधिकारियों को अवगत करा दिया है।
- डॉ. दीपा जाखड़, सिविल सर्जन, रोहतक।