रोहतक के रुड़की गांव के विश्ववारा कन्या गुरुकुल की प्राचार्य डॉ. सुकामा आचार्य करनाल स्थित गन्ना प्रजनन संस्थान के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के पूर्व अध्यक्ष और गन्ना उत्पादन में देश को अग्रणी बनाने वाले डॉ. बख्शी राम को बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री सम्मान से नवाजा।
झज्जर के गांव आकपुर में पैदा हुई डॉ. सुकामा को महिला सशक्तीकरण और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया है। उन्होंने अपना जीवन आर्य समाज की शिक्षा को फैलाने के लिए समर्पित किया है।
कौन हैं डॉ. सुकामा
विश्ववारा कन्या गुरुकुल रुड़की की प्राचार्य डॉ. सुकामा का जन्म झज्जर के गांव आकपुर में एक अक्तूबर 1961 को हुआ था। इनकी माता का नाम वेदकौर और पिता का नाम राजेंद्र देव सिंह है।
यह है शिक्षा
डॉ. सुकामा की शैक्षणिक उपलब्धी सूची काफी लंबी है। इसमें शास्त्री से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई शामिल है। श्रीमद दयानंदार्थ विद्यापीठ झज्जर से वर्ष 1978 में शास्त्री, 1980 में व्याकरणाचार्य, 1982 में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार से संस्कृत में स्नातकोत्तर, 1984 में श्रीमद दयानंदार्थ विद्यापीठ, झज्जर से वोदाचार्य, 1987 में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार से वैदिक इंद्र देवता महर्षि दयानंद के वेदभाष्य के परिप्रेक्ष्य में पीएचडी करने के अलावा वर्ष 1999 में कुसुमलता आर्य प्रतिष्ठान, साहिबाबाद का प्रकाशन किया।
व्यक्तित्व
डॉ. सुकामा प्राचीन गुरुकुल परंपरा में उच्च शिक्षा प्राप्त करके ब्रह्मचर्य दीक्षा ली और गुरुकुल पद्धति से कन्याओं को शिक्षित और संस्कारवार बना रही हैं। कर्मशील, परोपकारी एवं कर्तव्यपरायण जीवन, आपकी सादगी, सहनशीलता, विनम्रता, उदारता, समर्पण, उत्तम शिक्षण, कला का गुण इन्हें उच्च व्यक्तित्व के रूप में प्रतिष्ठित करते हैं। भारतीय संस्कृति के प्रचार, गुरुकुल पद्धति की प्राचीन परंपरा के प्रसार, नारी उत्थान व यज्ञीय जीवन के आदर्श को निर्वहन करने का पवित्र संकल्प धारण किया है।