फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Haryana: पीजीआई रोहतक में होगा बिना चीरा पोस्टमार्टम, उत्तर भारत का पहला संस्थान जो गढ़ेगा यह कीर्तिमान

Sat, 05 Aug 2023 10:49 AM IST
नवीन दलाल संजय कुमार, रोहतक (हरियाणा)

सार

पीजीआईएमएस के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग में संस्थान के अलावा स्वास्थ्य विभाग रोहतक, जींद, दादरी, भिवानी, झज्जर, रेवाड़ी आदि से शव पोस्टमार्टम के लिए आते हैं। यहां आने वाले शवों के सीटी स्कैन, एमआरआई व एक्स-रे जांच से उसके बारे में सारी जानकारी का पता लगाया जा सकेगा।
विज्ञापन
पीजीआई राेहतक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) मोर्चरी में वर्चुअल ऑटोप्सी के माध्यम से पोस्टमार्टम करने वाला उत्तर भारत का पहला संस्थान होगा। यहां मोर्चरी में बिना चीरा लगाए शवों का पोस्टमार्टम किया जा सकेगा। इसके लिए संस्थान अपनी मोर्चरी को अत्याधुनिक बनाने जा रहा है। इसे तैयार होने में छह माह से एक साल का समय लगेगा। इस तकनीक से शवों का पोस्टमार्टम देश में सिर्फ गोवा में किया जा रहा है। पीजीआईएमएस उत्तर भारत में पहला और देश में दूसरा संस्थान बनने जा रहा है।

विज्ञापन


छह माह से एक साल के बीच मोर्चरी तैयार करने में लगेगा समय
पीजीआईएमएस के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग में संस्थान के अलावा स्वास्थ्य विभाग रोहतक, जींद, दादरी, भिवानी, झज्जर, रेवाड़ी आदि से शव पोस्टमार्टम के लिए आते हैं। यहां आने वाले शवों के सीटी स्कैन, एमआरआई व एक्स-रे जांच से उसके बारे में सारी जानकारी का पता लगाया जा सकेगा। इस मोर्चरी को तैयार करने में लगभग 12 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके साथ ही जहर का पता लगाने के लिए केमिकल लैब लगाई जाएगी, इसमें भी खर्च लगभग 50 से 60 लाख रुपये आएगा।

संस्थान में साल में लगभग सात हजार से अधिक शवों का होता है पोस्टमार्टम
डॉक्टरों की टीम नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी गांधी नगर, गुजरात में प्रशिक्षण ले चुकी है और इस मामले में 14 व 15 सितंबर को संस्थान में कार्यशाला होनी है। इसके बाद पीजीआईएमएस टीम इस कार्य में पूर्ण रूप से दक्ष हो जाएगी। पोस्टमार्टम के बाद शव की हालात काफी खराब हो जाती थी, सामान्य व्यक्ति इसे देख पाने में भी सक्षम नहीं होता था। अब नई तकनीक से शव का आसानी से पोस्टमार्टम किया जा सकेगा।

विज्ञापन

कैसे काम करेगी तकनीक

वर्चुअल ऑटोप्सी तकनीक से शव में घावों की संख्या, गहराई, लंबाई-चौड़ाई का आसानी से पता लगाया जा सकेगा। मृतक को कितनी गोलियां लगीं और कहां-कहां लगीं, इसका पता लगाने के साथ उन्हें निकालना भी आसान होगा। जहर से मौत के मामले में उसी हिस्से को निकाला जाएगा जहां इसके प्रमाण मिलेंगे, इससे पूरे शव का चीर फाड़ नहीं किया जाएगा और समय भी बचेगा।

पीजीआईएमएस में आने वाले शवों की संख्या (सालाना)

  • पीजीआईएमएस : 3000 से अधिक
  • रेफर होकर : 1200 से अधिक
  • स्वास्थ्य विभाग रोहतक : 2500 से अधिक
विज्ञापन

पूरे शरीर पर चीरा नहीं लगाना पड़ेगा- डॉक्टर

वर्चुअल ऑटोप्सी से शव की चीरफाड़ रुक जाएगी। जहां गोली होगी, देखा जा सकेगा और वहीं से निकाला जा सकेगा। इसके अलावा जहर के मामले में प्रभावित अंग को देखा जा सकेगा और उसी को जांच के लिए लिया जाएगा, इससे पूरे शरीर पर चीरा नहीं लगाना पड़ेगा। हमारे यहां दो तल का भवन तैयार है। अंदर की फिनिशिंग का कार्य चल रहा है। इसमें पांच टेबल होंगी और यहां पुलिस, डॉक्टर, स्टाफ व आमजन के लिए वेटिंग हॉल भी होगा। यह क्षेत्र बदबूरहित होगा। यहां अब नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट के तहत 80 शव रखने की क्षमता होगी, इसके अलावा शव रखने के लिए चार-चार चैंबर भी होंगे। -डॉ. एसके धत्तरवाल, विभागाध्यक्ष, फोरेंसिक मेडिसिन, पीजीआईएमएस रोहतक।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें