सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की घटती संख्या ने शिक्षा विभाग को चिंता में डाल दिया है। बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराने में रुचि नहीं दिखा रहे अभिभावकों की शिक्षकों की ओर से काउंसिलिंग की जाएगी। विभाग ने प्रदेश में दाखिला संख्या में 12 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा है। साथ ही तय किया है कि हर शिक्षक और गैर शिक्षक स्टाफ को दो-दो नए दाखिले करवाने होंगे।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में 53 हजार से अधिक विद्यार्थी सरकारी विद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं। नए सत्र के सरकारी विद्यालयों में 13 अप्रैल तक दाखिले किए जाएंगे। तय किया गया है 72 हजार बच्चों के दाखिले हों। लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा विभाग की ओर से अधिकारियों से लेकर विद्यालयों के शिक्षक एवं गैर शिक्षक स्टाफ की ड्यूटी तय की गई है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत 2030 तक प्रदेश के अंदर छह वर्ष से 14 वर्ष तक की आयु के सौ प्रतिशत बच्चों का नामांकन का लक्ष्य है। इसी कड़ी में सरकारी विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा विभाग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निशुल्क प्रशिक्षण, निशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं उपचार, अनुसूचित जाति के कक्षा छठी एवं नौंवी के विद्यार्थियों के लिए मुफ्त साइकिल सुविधा, मेधावी विद्यार्थियों के लिए अनेक प्रकार की छात्रवृत्ति सुविधा, पिछड़ा वर्ग के बच्चों के लिए मासिक व वार्षिक प्रोत्साहन राशि, कक्षा पहली से आठवीं तक मुफ्त वर्दी, पुस्तकें, स्कूल बैग, स्टेशनरी व अन्य सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है।
पूर्व प्राथमिक कक्षा से 18 वर्ष आयु तक के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्य धारा में लाने का और जीरो ड्रॉप आउट लक्ष्य तय किया हुआ है। 72 हजार से अधिक दाखिले कराने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्टाफ का प्रत्येक सदस्य दो नए दाखिले इस सत्र में कराएगा। इसके लिए घर-घर जाकर संपर्क किया जा रहा है। जहां ड्राॅपआउट की संभावना है, काउंसिलिंग कर माता-पिता को प्रेरित किया जाएगा।
-दिलजीत सिंह, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी