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हरी खाद बढ़ाएगी जमीन की उर्वरा शक्ति

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खेतीबाड़ी विभाग ने जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने को हरी खाद को प्रोत्साहित करने की तैयारी है। जिसके लिए गेहूं की कटाई के बाद ढैंचे की खेती को प्रमोट किया जा रहा है। खेतीबाड़ी विभाग ने ढैंचे के बीच पर 80 फीसदी सब्सिडी देने की घोषणा की है। एक एकड़ के लिए किसानों को बारह किलोग्राम की थैली के सिर्फ 130 रुपये देने होंगे। अभी धान की रोपाई में दो माह का समय है। ढैंचे की फसल 45 दिन में तैयार हो जाती है। उसके बाद उसे जमीन में ही मिला दिया जाता है। 15 दिन में यह खाद के रूप में तैयार हो जाती है। यह हरी खाद का काम करती है और अगली फसल के लिए बहुत लाभदायक है। डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर रोहताश सिंह ने बताया कि इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। यह वायुमंडल से नाइट्रोजन लेकर पौधे को देती है, जो जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाता है। इसके साथ ही यह मिट्टी की प्राकृतिक संरचना में भी सुधार करता है। इसका एक और अहम फायदा यह है कि इससे जमीन में नमी ज्यादा देर तक बनी रहती है। अगली फसल में जब पानी लगाया जाता है तो वह जल्दी सूखता नहीं। इस तरह कम पानी लगाने की जरूरत पड़ती है। पिछले करीब चार सालों से विभाग इसे प्रोत्साहित कर रहा है। ताकि केमिकल खाद से जमीन की उर्वरा शक्ति को जो नुकसान पहुंचा है, उसे ठीक किया जा सके। वहीं, नमी की मात्रा बढ़ने से धान के लिए पानी की खपत भी कम की जा सके। विभाग ने इस साल दो हजार क्विंटल बीज बेचने का लक्ष्य रखा है। करीब साढ़े आठ एकड़ एरिया में ढैंचे का एक क्विंटल बीज डाला जाता है। इस तरह इस सीजन में करीब 17 हजार एकड़ एरिया कवर करने का लक्ष्य रखा गया है।
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आधार कार्ड दिखाकर मिलेगा बीज
सब्सिडी पर ढैंचे का बीज हासिल करने के लिए किसानों को हरियाणा बीज विकास निगम के बिक्री केंद्रों पर जाकर अपना आधार कार्ड दिखाना होगा। जिले में यह बीज पुराना बस अड्डा रोहतक, बूथ नंबर 44 अनाज मंडी महम, नया बस अड्डा कलानौर, किलोई बस अड्डा व अनाज मंडी सांपला में उपलब्ध होगा।
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