रोहतक। जिले के पांच गांवों लाढ़ौत, मकड़ौली कलां, मकड़ौली खुर्द और बसंतपुर से 28 फरवरी तक लालडोरा खत्म हो जाएगा। इसके बाद न केवल लाल डेरे के अंदर की संपत्ति के कागजात तैयार होंगे, बल्कि बाहर के एरिया के अवैध निर्माण भी वैध होंगे। इसके लिए डीसी आरएस वर्मा ने सोमवार को अधिकारियों की मीटिंग बुलाई है। संपत्ति के कागजात बनने के बाद ग्रामीण न केवल संपत्ति को आधिकारिक तौर पर खरीद व बेच सकेंगे, बल्कि बैंक से लोन भी ले सकेंगे।
डीसी आरएस वर्मा ने बताया कि सीएम मनोहर लाल ने एक दिन पहले हर जिले के पांच गांवों को लाल डोरा से मुक्त करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत जिले के लाढौत, भैयापुर, मकड़ौली कलां, मकड़ौली खुर्द और बसंतपुर गांवों को चुना गया है। इन गांवों में लाल डोरे को खत्म करने व लोगों की संपत्ति का आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड तैयार करने के लिए विशेष सर्वे करवाया जाएगा, जिसके बाद उन्हें संपत्तियों के दस्तावेज उपलब्ध करवाए जाएंगे। अभी तक लाल डोरे के अंदर की संपत्ति के कोई दस्तावेज नहीं थे, जिसके चलते इन्हें बेचना, खरीदना संभव नहीं था। लोग बैंक से लोन नहीं ले पाते थे। पांचों गांवों में 28 फरवरी तक सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जिला विकास और पंचायत अधिकारी नरेंद्र धनखड़ को इसका नोडल अफसर बनाया गया है। जो राजस्व विभाग के तहसीलदार व नायब तहसीलदार और उनके अधीनस्थ अमले से यह काम पूरा करवाएंगे। सीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर उपायुक्त ने 17 फरवरी 2020 को दोपहर साढ़े 3 बजे लघु सचिवालय सभागार में बैठक बुलाई है, जिसमें डीडीपीओ, जिला राजस्व अधिकारी, संबंधित तहसीलदार व खंड विकास व पंचायत अधिकारी, इन गांवों के सरपंच, नंबरदार और पटवारी शामिल होंगे। गौरतलब है कि करनाल के गांव सिरसी में यह पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था, उसकी सफलता के यह पूरे राज्य में लागू किया जा रहा है।
ऐसे होगा काम
जिला विकास व पंचायत अधिकारी नरेंद्र धनखड़ ने बताया कि सर्वे टीमों का गठन किया जाएगा। वे पांचों गांवों की संपत्तियों के नक्शे बनवाएंगे। उसके बाद लोगों से एतराज लिए जाएंगे। फिर एतराजों का निपटारा किया जाएगा। एक गांव के दो से ढाई हजार परिवारों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है।
पंचायती जमीनों पर रुकेंगे कब्जे
डीडीपीओ नरेंद्र धनखड़ ने कहा कि पांच गांवों के लाल डोरा मुक्त होने के बाद पंचायतों को भी फायदा होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत पंचायती जमीनों का भी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। अभी लोग पंचायती जमीन पर कब्जे कर लेते थे तो पंचायतों के लिए साबित करने में दिक्कत आती थी। लोग गलियों में चबूतरे आदि बना लेते थे। अब सारा रिकॉर्ड बन जाएगा तो कब्जे नहीं हो सकेंगे।