सामान्य अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के लिए अल्ट्रासाउंड की जांच करना आसान नहीं है। मरीजों को 15 दिन से एक माह तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों के लिए पीजीआई का रुख करना या निजी जांच केंद्र जाना मजबूरी हो जाता है। पीजीआई में भी आसानी से जांच नहीं हो पाती। जबकि निजी अस्पतालों में जांच काफी महंगी होती है। इतनी रकम खर्च करना हर मरीज के लिए संभव नहीं होता है। ऐसे मरीजों को इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। इस बीच मरीज का रोग बढ़ भी जाता है। कइयों की हालत गंभीर हो जाती है। खास करके गर्भवती महिलाओं को अधिक दिक्कत होती है।
सामान्य अस्पताल में प्रतिदिन 60 से 70 मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जाता है। जबकि दिन भर की 1200 से 1500 की ओपीडी में से तकरीबन 100 से 125 अल्ट्रासाउंड जांच डॉक्टरों की ओर से लिखी जाती है। अस्पताल में अल्ट्रा साउंड जांच के लिए एक बड़ी और एक पोर्टेबल मशीन मौजूद है। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन के पास कभी एक तो कभी दो जांचकर्ता उपलब्ध होते हैं। जब अस्पताल में दो जांचकर्ता होते हैं तो कुछ हद तक समस्या का समाधान हो जाता है, लेकिन इन दिनों एक जांच कर्ता के अवकाश पर होने की वजह से समस्या बनी हुई है। अस्पताल में आए मरीजों का रोष है कि डॉक्टर जांच लिखते हैं और उन्हें जांच के नाम पर तारीख मिलती है। ऐसे में उनका रोग बढ़ जाता है। इलाज कराना है तो निजी अस्पताल जाना पड़ता है जहां की फीस सभी के बस की बात नहीं होती है।
इमरजेंसी छोड़ कई केस रहते हैं पेंडिंग
सामान्य अस्पताल में इमरजेंसी केस को छोड़कर कई केस पेंडिंग रहते हैं। इनके लिए महंगी कीमत पर निजी जांच केंद्रों पर जांच करवाने का विकल्प ही बचता है। सूत्रों की मानें तो कुछ डॉक्टर जानबूझ कर अल्ट्रासाउंड जांच लिखते हैं, ताकि मरीज बाहर जांच करवाए और उन्हें कमीशन मिले। बताया जाता है कि एक अल्ट्रासाउंड की जांच पर दो से तीन सौ रुपये कमीशन मिल जाते हैं।
भीड़ कम करने के लिए दो समय होती है जांच
अस्पताल प्रबंधन ने पिछले दिनों जांच की तारीखों की तिथि घटाने के लिए सुबह और शाम अल्ट्रासाउंड जांच का प्रावधान किया था। इसका असर यह था कि मरीजों की काफी समस्या का हल हो गया था, लेकिन यह समस्या एक बार फिर शुरू हो गई है।
अस्पताल में होती है फ्री जांच, बाहर लगते हैं 1200
मुख्यमंत्री निशुल्क उपचार योजना के तहत सामान्य अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच निशुल्क होती है। जबकि निजी जांच केंद्रों में इसकी कीमत 600 से 1200 रुपये तक वसूल की जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह जांच मुसीबत बन जाती है।
बोले अधिकारी
हमारे पास दो अल्ट्रासाउंड मशीन हैं। फिलहाल एक डॉक्टर अवकाश पर चल रहे थे, इसलिए कुछ समस्या आ रही थी। वे जल्द ड्यूटी पर आ रहे हैं, इसके बाद समस्या का समाधान हो जाएगा। इसके अलावा अस्पताल में कोई गड़बड़ी नहीं है।
- डॉ. रमेश चंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, सामान्य अस्पताल