रोहतक में फायरिंग में 11 गोली मारकर राकेश उर्फ बंटू की हत्या कर दी गई, जो गांव के पूर्व सरंपच श्रीभगवान का भतीजा था। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए छिप्पी गैंग के सरगना अनिल छिप्पी, उसके भाई सोमबीर व कुख्यात संदीप उर्फ काला जठेड़ी सहित अन्य आरोपियों को नामजद किया था।
कारोर की खूनी गैंगवार में नया मोड़ आ गया है। जेल में बंद छिप्पी गैंग के सरगना अनिल छिप्पी, संदीप उर्फ काला जठेड़ी सहित पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही एएसजे रजनी यादव की अदालत ने 2009 में हुई राकेश उर्फ बंटू की हत्या के दोषियों पर 30-30 हजार रुपये व अनिल छिप्पी पर 40 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।
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पुलिस रिकार्ड के मुताबिक कारोर गांव में 2001 से चल रही खूनी रंजिश चल रही है, जिसमें 19 लोगों की हत्या हो चुकी है। आरोप है कि श्रीभगवान गांव का सरपंच था। दिल्ली में हुई कहासुनी के बाद श्रीभगवान और गांव निवासी रामे के बीच नोकझोंक हो गई थी। श्रीभगवान ने रामे को थप्पड़ मार दिया था। इसी रंजिश में सबसे पहले वर्ष 2001 में सेवकराम की खरावड़ रेलवे स्टेशन पर गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद दूसरे पक्ष के रामे की हत्या की गई। इसके बाद पहले पक्ष के श्रीभगवान, फूल कुमार, बंटू, दिलबाग, रणवीर समेत नौ की हत्या हुई। जबकि छिप्पी गुट से रामे और रमेश समेत छह की हत्या की गई। 2018 में आनंदपाल की हत्या की दी गई। पिछले साल दिवाली के दिन गांव के युवक मोहित की हत्या की दी गई, इसमें छाजू गुट का नाम सामने आया था।
2009 में शादी समारोह में की थी छिप्पी गैंग ने राकेश उर्फ बंटू की हत्या
पुलिस रिकार्ड के मुताबिक साल 2009 में गांव में शादी समारोह चल रहा था, जिसमें अंधाधुंध फायरिंग की गई। फायरिंग में 11 गोली मारकर राकेश उर्फ बंटू की हत्या कर दी गई, जो गांव के पूर्व सरंपच श्रीभगवान का भतीजा था। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए छिप्पी गैंग के सरगना अनिल छिप्पी, उसके भाई सोमबीर व कुख्यात संदीप उर्फ काला जठेड़ी सहित अन्य आरोपियों को नामजद किया था। केस में तीन आरोपी पीओ है, जबकि एक आरोपी फैसले के दिन अदालत में नहीं आया। अदालत ने अनिल छिप्पी व काला उर्फ जठेड़ी सहित पांच को हत्या के केस में उम्रकैद की सजा सुनाई है।
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गवाही अहम साबित हुई, 2009 से चल रहा था केस
पीड़ित पक्ष के वकील सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि केस के अंदर दो गवाही अहम साबित हुई। 2009 से हत्या का केस चल रहा था, जिसमें पांच को दोषी मानते हुए सजा सुनाई गई है, जबकि तीन पहले से पीओ हैं। एक अभियुक्त अदालत में फैसले के दिन नहीं आया। वह जमानत पर चल रहा है। दोनों पक्षों के बीच और भी केस चल रहे हैं।