सामूहिक दुराचार मामले में पीड़ित किशोरी ने हरियाणा पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
पीड़िता
ने कोर्ट से अपील की है कि इस मामले की जांच सीबीआई या दिल्ली पुलिस से
करवाई जाए। उसका आरोप है कि हरियाणा पुलिस मामले को दबाने के प्रयास में है
और उसे हरियाणा एसआईटी द्वारा की जा रही जांच में न्याय की उम्मीद नहीं
है। मामले पर उच्चतम न्यायालय सोमवार को सुनवाई करेगा।
पीड़िता का
आरोप है कि अपहरण के बाद 15 दिन के भीतर उसके साथ नौ लोगों ने दुराचार
किया, जिसमें एक झज्जर पुलिस का कर्मचारी भी शामिल है। इसके अलावा रोहतक
जिले में उसे एक दिन पुलिस ने अवैध हिरासत में भी रखा। अभी तक पुलिस ने सभी
आरोपियों के खिलाफ दुराचार का केस तक दर्ज नहीं किया है।
पीड़िता से नहीं हुई एसआईटी की बात
बाल
संरक्षण आयोग के दखल के बाद इस मामले में रोहतक एसपी ने वीरवार को एसआईटी
का गठन किया था। एसआईटी ने पीड़िता से संपर्क किया, वह दिल्ली में होने की
वजह से एसआईटी के समक्ष पेश नहीं हो सकी।
यह है मामला
26
अक्तूबर को क्षेत्र के एक गांव की किशोरी का गांव धौड़ निवासी प्रदीप ने
अपहरण कर लिया था। पीड़िता का आरोप है कि पंद्रह दिनों के दौरान उसके साथ
नौ लोगों ने हरियाणा, दिल्ली, गुड़गांव आदि जगहों पर दुराचार किया था। आठ
नवंबर को कलानौर पुलिस ने उसे गुड़गांव से बरामद किया। पीड़िता ने परिजनों
को आपबीती बताई और इस संबंध में आईजी को 11 नवंबर को एक शिकायत भी दी। साथ
ही बुधवार को इस संबंध में बाल संरक्षण आयोग ने पीड़िता के बयान दर्ज करवाए
थे। इसके बाद पुलिस ने जांच के लिए एसआईटी गठित की है। इस मामले में पुलिस
दिल्ली से एक युवक ऋषिपाल को गिरफ्तार कर चुकी है।
दुराचार के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रदर्शन
रोहतक।
सामूहिक दुराचार के आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर उन्हें सख्त सजा दिलवाने
की मांग को लेकर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति रोहतक की जिला कमेटी ने
शहर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिला उपायुक्त को ज्ञापन भी
सौंपा। समिति की राज्य सहसचिव सविता के नेतृत्व में काफी संख्या में समिति
की सदस्य मानसरोवर पार्क में एकत्रित हुई और दुराचार के आरोपियों को सख्त
सजा दिलवाने की मांग को लेकर नारेबाजी की।