महेंद्रगढ़। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से दस दिवसीय श्रीगणेश महोत्सव शुरू हो जाएगी। बुधवार को विधिवत पूजा के साथ घर-घर गणपति बप्पा विराजेंगे। गणेश चतुर्थी को मिट्टी से बनी श्रीगणेश की मूर्ति को घरों, मंदिरों और पंडालों में स्थापित की जाएगी। पंडालों में धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. राहुल भारद्वाज गढ़ी ने बताया कि गणेश महोत्सव 27 अगस्त से छह सितंबर तक चलेगा। मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना के लिए भगवान गणेश का आह्वान किया था। महर्षि व्यास बोलते गए और गणपति भगवान बिना रुके 10 दिनों तक महाभारत लिखते गए।
इन दस दिनों में भगवान गणेश एक ही मुद्रा में बैठे रहे। इस बीच उनके ऊपर धूल मिट्टी की परत जम गई जिसे साफ करने के लिए अनंत चतुर्दशी को गणेश जी ने खुद सरस्वती नदी में स्नान कर खुद को साफ किया। रिद्धि सिद्धि के दाता गणपति को मोदक और लड्डू का भोग लगाना चाहिए और ऊं गं गणपतये नमः मंत्र का उच्चारण करते हुए रोज दूब चढ़ाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि भगवान गणेश को बुद्धि का देवता माना गया है, अच्छी बुद्धि और विद्या की प्राप्ति के लिए गणपति की पूजा-अर्चना का विधान है और इन 12 नामों का जाप करना चाहिए।
गणेशजी के वैसे तो अनेक नाम हैं लेकिन ये सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन नामों का जाप सुफल प्रदान करता है।
शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान गणेश के इन 12 नामों का पाठ करने से विद्या चाहने वाले को विद्या, धन चाहने वाले को धन, पुत्र चाहने वाले को पुत्र और मोक्ष की इच्छा रखने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यह है मूर्ति स्थापना, पूजा का शुभ मुहूर्त
पं. राहुल भारद्वाज ने बताया कि गणेश चतुर्थी पर कई शुभ योग बन रहे हैं जो इस दिन की महत्ता को और भी बढ़ा रहे हैं। इस दिन प्रीति योग, सर्वार्थ सिद्धि योग व रवि योग के साथ इंद्र-ब्रह्म योग का संयोग बन रहा है। कर्क राशि में बुध और शुक्र का संयोग बनने से लक्ष्मी-नारायण योग बन रहा है, जो समृद्धि, धन और पारिवारिक जीवन के सुख का प्रतीक है। मूर्ति स्थापना और पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 6:02 बजे से सुबह 9:15 बजे तक रहेगा। इसके बाद शुभ का चौघड़िया रहेगा जो सुबह 10:51 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा।