सरकार प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की बात करती है और सरकारी विभाग उसकी मुहिम को पलीता लगा देते हैं। एक ताजा कारनामा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में किया गया है। विभाग की ओर से पहले काम करा दिया गया उसके बाद उसी काम को कराने के लिए आनलाइन टेंडर जारी किया गया। आनलाइन टेंडर जारी होने के बाद सबसे कम राशि घोषित करने वाले ठेकेदार को टेंडर देना पड़ा। इसके बाद बिना टेंडर काम कराने वाले ठेकेदार का बिल फंस गया। विभाग को अब यह मामला न तो निगलते बन रहा है और न उगलते।
वार्ड-13 के अशोक नगर और सती साईं मंदिर वाली गली में कुछ माह पहले पेयजल लाइन बिछाई गई। जब काम पूरा हो गया तो विभाग की ओर से इस काम को कराने के लिए आनलाइन टेंडर जारी किया गया। इसकी शुरूआती कीमत एक लाख 91 हजार 846 रुपये रखी। इस गुप्त काम की जानकारी रखने वाले एक ठेकेदार ने आनलाइन टेंडर की कीमत 33 प्रतिशत कम करते हुए एक लाख 34 हजार 106 रुपये भर दी। नियमानुसार विभाग को टेंडर कम बोली लगाने वाले ठेकेदार को देना जरूरी हो गया। जबकि काम दूसरे ठेकेदार से पहले ही कराया जा चुका था। अब इस कार्य के बिल को लेकर विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार में खींचतान चल रही है।
नहीं दी जा रही आरटीआई में जानकारी
वार्ड-13 के निगम पार्षद संजय सैनी ने बताया कि हैरानी की बात है कि मेरे एरिया में काम कराया गया और मुझे जानकारी नहीं है। पेयजल लाइन बिछा दी जाती है और टेंडर बाद में जारी होता है। इससे शक पैदा होता है। यदि काम अपनी मर्जी से करवाना है तो आनलाइन टेंडर जारी करने का ड्रामा क्यों किया गया ? हैरानी तो इस बात की है कि विभाग के अधिकारी आरटीआई का जवाब तक नहीं देते।
बोले अधिकारी
इस मामले में कार्यकारी अभियंता, एसडीओ से बात करेंगे। पूरी जानकारी उन्हीं के पास है। नियमों को तोड़कर काम नहीं कराया जा सकता। यदि किसी को आरटीआई का जवाब नहीं मिल रहा तो वह अगली कार्रवाई कर सकता है।
- प्रदीप कुमार, अधीक्षण अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग
कुछ दिन पहले ही चार्ज लिया है। इस कारण पुराने मामलों की जानकारी नहीं है। इस मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार से बात करके तह तक जाएंगे। विभाग में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी।
- शिवराज चौहान, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग