रोहतक। पूर्व मंत्री पदमश्री सेठ श्रीकिशन दास की प्रतिमा विवाद में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से जवाब मांगा है कि किस तरह नियमों का उल्लंघन हुआ है। मामले में नगर निगम शु्क्रवार को पत्र लिखकर फिर से मार्गदर्शन लेगा। आखिर निगम प्रशासन पूरे मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए।
पूर्व मेयर मनमोहन गोयल ने बताया कि डीसी कार्यालय से अनुमति लेकर सोनीपत स्टैंड पर पदमश्री सेठ श्रीकिशन दास की प्रतिमा स्थापित की थी, इसके साथ ही सोनीपत चौंक का सुंदरीकरण करवाया था। उनकी तरफ से अदालत में याचिका दायर कर सवाल उठाया गया है कि शहर में उनके पिता की प्रतिमा के अलावा और भी प्रतिमाएं हैं। सार्वजनिक स्थान की परिभाषा की व्याख्या की जाए। याचिकाकर्ता बताएं कि बाकी प्रतिमाओं से उनको कोई आपत्ति नहीं है। केवल उनके पिता की प्रतिमा से ही आपत्ति है। दूसरा, कानून सबसे के लिए बराबर है। अब हाईकोर्ट मामले में 17 जनवरी को सुनवाई करेगा।
पूर्व मंत्री सेठ श्रीकिशन दास 1996 में बंसीलाल सरकार में मंत्री रहे। उनके बेटे व नगर निगम के पूर्व मेयर मनमोहन गोयल की ओर से गठित ट्रस्ट ने पिछले साल सोनीपत स्टैंड पर पूर्व मंत्री की प्रतिमा स्थापित की थी। मकड़ौली निवासी देवेंद्र शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि सोनीपत स्टैंड पर जहां प्रतिमा स्थापित की गई, वहां पहले पुलिस बूथ था। सुप्रीम कोर्ट की एक केस में फैसला देते हुए गाइडलाइन जारी की थी। इसके तहत किसी भी सार्वजनिक स्थान पर प्रतिमा स्थापित नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त से 2 दिसंबर को जवाब मांगा था। उसी दिन पूर्व मेयर मनमोहन गोयल ने हाईकोर्ट में अपनी तरफ से अर्जी दायर कर केस में दायर याचिका पर सवाल उठाए थे।