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Holi 2025: कोरड़ा मार के बीच हरियाणा में 50 साल से खेली जा रही बैठकी होली, पानीपत से लेकर फरीदाबाद तक मची धूम

Thu, 13 Mar 2025 11:40 AM IST
नवीन दलाल देवेन्द्र दीक्षित, रोहतक (हरियाणा)

सार

रोहतक में 9 मार्च से बैठकी होली विधिवत शुरुआत हो गई है। कुमाऊं सभा महिला कीर्तन मंडली ने पारंपरिक वेशभूषा में होली गायन शुरू कर दिया है। काॅलाेनी में कुमाऊं सभा के धर्मशाला में फिलहाल होली गायन चल रहा है।
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बैठकी होली की महफिल - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हरियाणा की प्रसिद्ध कोरड़ा मार होली के बीच प्रदेश में करीब 50 से अधिक वर्षों से राग रागनियों पर आधारित कुमाऊं की बैठकी होली खेली जा रही है। बैठकी होली की महफिल दुल्हंडी से करीब 10 दिन पहले ही सजनी शुरू हो जाती है। महिला और पुरुष होल्यार टोलियां बनाकर हारमोनियम और तबले की थाम पर गीत गाकर एक-दूसरे को होली की मुबारकबाद देते हैं। रोहतक, पानीपत और फरीदाबाद समेत प्रदेशभर में बैठकी होली का दाैर शुरू हो गया है।

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कुमाऊं सभा रोहतक के चेयरमैन आरके पालीवाल बताते हैं उत्तराखंड के अल्मोड़ा, रानीखेत और नैनीताल से यहां आकर बसे भोला सिंह तड़ियाल, हीरा सिंह, हरि सिंह, लक्ष्मण सिंह तड़ियाल, प्रेम बल्लभ शर्मा, ख्याल सिंह कड़ाकोटी, रूप सिंह भूपियाल, पुरुषोत्तम दत्त काला, जगत सिंह कड़ाकोटी, राजेश सिंह रावत, गोपाल सिंह रावत आदि ने कुमाऊं की एतिहासिक बैठकी होली की परंपरा शुरू की थी।

फिर कुमाऊं की परंपराओं, और लोक त्योहारों को आगे बढ़ाने के लिए साल 1975 में कुमाऊं सभा का गठन किया। आरके पालीवाल बताते हैं यूं तो कुमाऊं में वसंत पंचमी के दिन से होली गायन शुरू हो जाता है। लेकिन, प्रदेश में ज्यादातर लोगों के नौकरीपेशा होने के कारण त्योहार से 8 या 9 दिन पहले ही बैठकी होली शुरू होती है।
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महिलाओं की बैठकी होली का दौर शुरू
रोहतक में 9 मार्च से बैठकी होली विधिवत शुरुआत हो गई है। कुमाऊं सभा महिला कीर्तन मंडली ने पारंपरिक वेशभूषा में होली गायन शुरू कर दिया है। काॅलाेनी में कुमाऊं सभा के धर्मशाला में फिलहाल होली गायन चल रहा है। 12 मार्च को कुमाऊं सभा भवन एकता काॅलोनी से घर-घर जाकर होली बधाई का कार्यक्रम शुरू होगा। 14 मार्च को होली का समापन होगा।

रोहतक में करीब 7000 उत्तराखंडी करते हैं निवास
साल 1960 के करीब अल्मोड़ा, रानीखेत और नैनीताल आदि क्षेत्रों से सर्विसमैन रोहतक आए थे। धीरे-धीरे इनका परिवार बढ़ता गया और रोहतक में एकता काॅलोनी, कबीर काॅलोनी, श्रीनगर काैलानी, चिन्नाैट काॅलोनी, ताऊ देवीलाल नगर और सेक्टरों में उत्तराखंड के लोग बसते चले गए। वर्तमान में करीब 7000 उत्तराखंड के लोग रह रहे हैं।

क्यों खास है कुमाउंनी होली
कुमाऊं सभा के प्रधान आनंद सिंह कड़ाकोटी व महासचिव त्रिलोक सिंह चाैधरी बताते हैं कुमाउंनी होली में सिर्फ अबीर-गुलाल का टीका ही नहीं होता, बल्कि बैठकी होली, खड़ी होली गायन की शास्त्रीय परंपरा भी शामिल है। बैठकी होली में महिलाएं मीराबाई से लेकर नजीर और बहादुर शाह जफर की रचनाएं सुनाती हैं। वहीं, खड़ी होली बैठकी के कुछ दिनों बाद शुरू होती है। खड़ी होली में लोग नुकीली टोपी, कुर्ता और चूड़ीदार पायजामा पहनकर एक जगह एकत्रित होकर होली गीत गाते हैं। साथ-साथ ढोल-दमाऊ और हुड़के की धुनों पर नाचते भी हैं।

पानीपत से लेकर फरीदाबाद तक मची होली की धूम
कुमाउंनी होली की प्रदेशभर में धूम मची हुई है। कुमाऊं संस्थान पानीपत के प्रधान गाैरव रावत बताते हैं पानीपत में 1984 से उनकी संस्था का गठन हुआ था। तब से लेकर होली गायन की परंपरा जारी है। इस समय महिलाओं की बैठकी होली चल रही है। होली मिलन समारोह आयोजित होने लगे हैं। उन्होंने बताया कि पानीपत में कुमाऊं और गढ़वाल की मिलाकर करीब 20 हजार से अधिक आबादी रहती है। इसी तरह कुमाऊं भ्रात मंडल फरीदाबाद के प्रधान बालम सिंह बिष्ट ने बताया कि फरीदाबाद में 7 मार्च से बैठकी होली शुरू हो चुकी है। महिलाएं घर-घर जाकर टोलियां बनाकर होली गायन कर रही हैं।

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