प्रदेश में मानसून शबाब पर है। कुरुक्षेत्र में मारकंडा नदी खतरे के निशान को पार करने वाली है।
यमुनानगर में यमुना नदी उफान पर है। सिरसा और आसपास में घग्गर नदी में बढ़ता पानी चिंता बढ़ा रहा है।
प्रदेश में जलभराव आम चुका है। बावजूद इसके एक दर्जन से अधिक जिलाें में बाढ़ राहत प्रबंधन का सामान मानसून के बाद ही पहुंच पाएगा।
कारण, साफ तौर पर अफसरी लापरवाही है। प्रदेश सरकार की ओर से जिलाें को आपदा राहत प्रबंधन के लिए दस लाख की ग्रांट जारी की गई थी।
लेकिन अधिकतर जिलाें ने राशि को खर्च ही नहीं किया है। रोहतक में भी अब जाकर राहत प्रबंधन के सामान का आर्डर दिया है, हालांकि डिलीवरी होने में अभी भी एक माह लगेगा।
अधिकारियाें की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकतर जिलाें में बाढ़ एवं अन्य आपदा से निपटने के लिए पुख्ता तैयारी है ही नहीं। ज्यादातर जिलाें में या तो आपदा से निपटने में इस्तेमाल होने वाले सामान या तो है ही नहीं, और अगर हैं भी तो सालाें पुराने होने के कारण वो खस्ताहाल हो चुके हैं।
नोएडा में है आपदा रैपिड एक्शन फोर्स
देश भर में कुल आठ रैपिड एक्शन फोर्स हैं। रैपिड एक्शन फोर्स के पास अत्याधुनिक उपकरण भी साथ होते हैं जिससे इनके लिए आपदा से पीड़ित लोगाें को बाहर निकालना बहुत आसान होता है। इनकों विशेष ट्रेनिंग भी मिली होती है। रोहतक सहित हरियाणा के अधिकतर जिले नोएडा स्थित इसी रैपिड एक्शन फोर्स के तहत आते हैं। ऐसे में पहुंचने तक में लगने वाले 4 घंटाें तक स्थिति को संभालने के लिए भी प्रशासन को पसीने आ सकते हैं।
ये आपदा प्रबंधन सामान की लिस्ट
1. लाइफ जैकेट्स
2. वाटर नेट
3. मनीला रोप
4. डैड लैंप
5. टावर लाइट
6. रिफ्लेक्टरर्स
7. रबर शूज
8. रबर सूट
9. पोर्टेबल लेन सैट
10. पूरा गोताखोर सूट (सुविधा उपकरण सहित)
‘बाढ़ एवं अन्य आपदा से निपटने केलिए आई ग्रांट से विशेष उपकरण मंगाए गए हैं। उम्मीद है कि जल्दी ही इनकी डिलीवरी हो जाएगी।’
- अमित खत्री, एडीसी, रोहतक।