कोर्ट ने शिमली के बहुचर्चित चौहरे हत्याकांड में तीन आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। बरी किये गए आरोपियों को वर्ष 2011 में स्थानीय कोर्ट ने दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद हाईकोर्ट में अपील की गई थी तो केस हाईकोर्ट से ट्रांसफर होकर सुनवाई के लिए जिला कोर्ट में दोबारा आया था।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जसवीर सिंह की अदालत में चले अभियोग के अनुसार जून 2006 को सदर थाना क्षेत्र के शिमली में गांव के ही प्रेमसिंह, राजेश, ठंडीराम और अमरजीत की गोली मारकर हत्या की दी गई थी। पुरानी रंजिश में वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस ने हवलदार सुरेश की शिकायत पर गांव के ही बहादुर सिंह, सूरजभान, सतपाल, जयदेव, हरमेंद्र और धर्मपाल खिलाफ केस दर्ज किया था।
पड़ताल के बाद पुलिस ने आरोपी जयदेव, हरमेंद्र और सूरजभान को गिरफ्तार किया था। तीनों आरोपी सीआरपीएफ में नौकरी करते थे। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया था। इसके बाद मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कमलकांत की अदालत ने तीनों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
इसके बाद तीनों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने केस स्टडी करने के बाद मामले को ट्रायल के लिए दोबारा रोहतक कोर्ट में भेज दिया था। इस मामले में दोबारा गवाही कराई गई। साथ ही दोनों पक्षों की बातों को सुना गया। अदालत ने कसे की सुनवाई के बाद तीनों आरोपियों को सबूतों के अभाव में निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया।
तीन भगौड़े आरोपियों का सुराग नहीं
मामले में अभी तक आरोपी बहादुर सिंह, सतपाल और धर्मपाल का सुराग नहीं लग सका है। वारदात के बाद से ही तीनों आरोपी फरार हैं। कोर्ट में पेश नहीं होने के कारण तीनों आरोपियों को कुछ समय पहले भगौड़ा घोषित कर दिया गया था। पुलिस आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।