पांच सदस्यीय टीम ने सोमवार को रैन बसेरा अग्निकांड की जांच शुरू कर दी है। प्राथमिक जांच में नगर निगम की 83 लाख रुपये की संपत्ति क्षति होने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा तैनात चौकीदार को पांच लाख के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। जांच टीम का दावा है कि आग शार्ट सर्किट के कारण लगनी शुरू हुई थी, जो गैस सिलिंडर के पाइप के जलने से और भड़क गई थी। इस दौरान टीम ने करीब साढ़े तीन घंटे तक रैन बसेरा की गहनता से जांच की है1।
नगर निगम आयुक्त प्रदीप गोदारा ने रैन बसेरा में आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए मुख्य कराधान अधिकारी जगदीश शर्मा के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम गठित की है। टीम के नोडल अधिकारी जगदीश शर्मा सोमवार को जांच करने के लिए रैन बसेरा पहुंचे। इसके अलावा नगर निगम की ओर से रैन बसेरा में रखवाए गए सामानों का भी मिलान करके नुकसान का आकलन किया गया। उन्होंने बताया कि रैन बसेरा 63 लाख रुपये में टिन और फाइबर से तैयार किया गया था। इसके अलावा 20 लाख रुपये में गीजर, सोलर लाइट पैनल, वाटर प्यूरीफायर, छह फायर इस्टिंग्युसर, 200 गद्दे, 200 कंबल, सीसीटीवी, डीवीआर, एलसीडी, 20 पंखे, इनवर्टर-बैटरी, छह अलमारी आदि रखवाए गए थे, जो जलकर नष्ट हो गए हैं।
हर पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। जांच के बाद स्पष्ट हो गया है कि आग की शुरूआत शार्ट सर्किट से हुई है। फाइबर की सीट में लगी आग तेजी से फैलते हुए रसोई में रखे गैस सिलिंडर के पाइप में लग गई थी। इसकी वजह से आग भड़क गई और पूरे रैन बसेरा को नष्ट कर दिया। पूरे मामले की जांच रिपोर्ट जल्द ही आयुक्त को सौंप दी जाएगी।
-जगदीश शर्मा, नोडल अधिकारी
प्रदेश में मॉडल-पांच था रैन बसेरा
प्रदेश सरकार के आदेश पर एक कंपनी ने प्रदेश में 26 स्थानों पर रैन बसेरा बनाए थे। रोहतक का रैन बसेरा 63 लाख रुपये में दो मंजिला बनाकर तैयार किया गया, जो मॉडल-पांच के नाम से जाना जाता है।
सीसीटीवी का डीवीआर जला हुआ मिला
नगर निगम की टीम ने सोमवार सुबह सबसे पहले सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर तलाशा। आग की हकीकत पता चल सके। इस दौरान टीम को पूरी तरह से जला हुआ डीवीआर मिला है।
रैन बसेरा अग्निकांड की जांच में लीपापोती की ‘आंच’
रैन बसेरा अग्निकांड के दूसरे दिन ही शुरू की गई जांच में लीपापोती की ‘आंच’ लगती दिख रही है। मामले में जांच टीम के नोडल अधिकारी ने दावा किया कि रैन बसेरा में सिर्फ एक चौकीदार रहता है। उधर, महिलाकर्मी सुदेश ने सोमवार को नोडल अधिकारी का दावा खारिज करते हुए बताया है कि वह दो साल से अधिकारियों के आदेश पर रैन बसेरा में परिवार के साथ रह रही है। उसकी ड्यूटी एक अफसर के घर की सफाई के लिए लगाई गई है। इसके बाद वह बाकी समय रैन बसेरा की चौकीदारी करती है।
जांच टीम के नोडल अधिकारी जगदीश शर्मा ने बताया कि रैन बसेरा में सिर्फ एक चौकीदार उमेद है। रैन बसेरा में बने एक कमरे में वह अपने परिवार के साथ रहता है। उन्होंने बताया कि यहां पूर्व में कोई महिला चौकीदार तैनात नहीं की गई थी। जिस महिला के बारे में बताया जा रहा है, वह उमेद की रिश्तेदार होने की वजह से आई हुई थी। महिला का रैन बसेरा में ही परिवार समेत रहने के दावे पर जगदीश शर्मा ने कहा कि करीब छह माह पहले उसको हटाकर दूसरी जगह लगा दिया गया था।
उधर, महिलाकर्मी सुदेश ने बताया कि वह दो साल से अपने परिवार से साथ रैन बसेरा में रह रही है। उसके साथ उसका बेटा भी रहता है। अग्निकांड के समय उसकी विवाहित बेटी अपने पति व बच्चों के साथ आई थी। आग लगने के दौरान सभी लोगों ने भाग कर अपनी जान बचाई है। आग से उसके घर का सारा सामान जलकर नष्ट हो गया है। कोई भी उसके नुकसान के बारे में सुन नहीं रहा है। उसने बताया निगम के एक अधिकारी के आदेश पर वह जाट भवन के नजदीक एक घर की रोजाना सफाई करने के लिए जाती है। वहां से लौटने के बाद रैन बसेरा में चौकीदारी भी करती है।
उधर, चौकीदार उमेद का कहना है कि सुदेश रैन बसेरा में ही रहती है। वह सुबह के समय एक घर में सफाई करने के लिए जाती है। उसे दो साल पहले चौकीदार के रूप में रैन बसेरा में लगाया गया था।
जांच टीम को सभी लोगों की बात सुननी चाहिए। यदि महिला कर्मचारी रैन बसेरा में परिवार समेत रहने का दावा कर रही है तो उसकी बात भी टीम सुनेगी। जब महिला रैन बसेरा में चौकीदार नहीं थी तो वह किसके आदेश पर वहां रह रही थी। इसमें संलिप्त कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-प्रदीप गोदारा, नगर निगम (रोहतक)