कर्मचारी वर्ग...
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। जिले की महिला नर्सिंग ऑफिसर सरकार की तबादला नीति से असंतुष्ट हैं। इन्होंने पारिवारिक व निजी समस्याओं का हवाला देते हुए इसमें बदलाव की मांग की है।
नर्सिंग वेलफेयर एसोसिएशन रोहतक की अध्यक्ष दीपा का कहना है कि नर्सिंग कैडर में करीब 90 प्रतिशत महिला कर्मचारी हैं। ये सभी शिफ्ट व नाइट ड्यूटी में लगातार काम कर रही हैं। ज्यादातर महिलाएं शादीशुदा हैं। इनके छोटे-छोटे बच्चे हैं।
बार-बार तबादला होने से बच्चों की पढ़ाई और परिवार की देखभाल में परेशानी आती है। स्टाफ पहले ही ड्यूटी के दौरान मानसिक व शारीरिक दबाव में रहता है। ऐसे में दूर-दराज स्थानों पर ट्रांसफर होने से परेशानी बढ़ जाती है। इससे परिवार पर भी असर पड़ता है।
नर्सिंग ऑफिसर प्रीति ने कहा कि स्टाफ दिन-रात मरीजों की सेवा करता है। ज्यादातर कर्मचारी महिलाएं हैं। इन पर घर और बच्चों की जिम्मेदारी भी होती है। बार-बार ट्रांसफर से उन्हें बहुत परेशानी होती है। सरकार को ट्रांसफर नीति बनाते समय उनकी पारिवारिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में ट्रांसफर नीति में बदलाव कर कर्मचारियों को राहत दी जाए।
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यह है ट्रांसफर नीति
स्वास्थ्य विभाग की ओर से पहली बार ट्रांसफर नीति लाई गई है। इसके अनुसार हर तीन साल में ट्रांसफर लेना अनिवार्य किया गया है। विभाग ने इसे लेकर पोर्टल भी तैयार कर दिया है। पोर्टल पर डाटा भी अपलोड कर दिया गया है। एसोसिएशन की ओर से डीजीएचएस, सिविल सर्जन और पीएमओ को मांग पत्र भेजकर नर्सिंग स्टाफ की समस्याओं को उठाया गया है। नर्सिंग वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रशासन से ट्रांसफर नीति में बदलाव की मांग की है।