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हॉस्टल से निकालने पर छात्र की हालत बिगड़ी

Tue, 06 Dec 2016 02:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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फीस जमा नहीं करने पर एफडीडीआई ने छात्रों को हॉस्टल से निकाला - फोटो : amar ujala
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फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई) के प्रबंधन ने फीस जमा नहीं करने वाले छात्रों को सोमवार को हॉस्टल से बाहर निकाल दिया। संस्थान की कार्रवाई के विरोध में छात्र-छात्राओं ने गेट के बाहर प्रदर्शन किया। शाम तक गेट के बाहर बैठे-बैठे एक छात्र की हालत बिगड़ गई तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रबंधन का कहना है कि स्टूडेंट फीस नहीं दे रहे हैं, जबकि स्टूडेंट का कहना है कि डिग्री विवाद की वजह से उन्हें किसी बैंक से लोन नहीं मिल रहा है। ऐसे में वह फीस कहां से जमा करें। छात्रों का कहना है कि प्रबंधन की तानाशाही नहीं चलने दी जाएगी।
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दरअसल, रविवार की छुट्टी होने के कारण हॉस्टल में रहने वाले कुछ छात्र अपने-अपने घर गए थे। सोमवार सुबह छात्र संस्थान में पहुंचे, लेकिन गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। सुरक्षाकर्मियों ने प्रबंधन के आदेश का हवाला देते हुए छात्रों को कहा कि जब तक वह हॉस्टल की फीस जमा नहीं करेंगे, तब तक उन्हें अंदर नहीं जाने दिया जाएगा। इस पर सभी छात्र गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। छात्र संदीप प्रियदर्शी, आशुतोष, हिमांशु, अमित और रवि आदि का कहना है कि संस्थान की डिग्री को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इस कारण कोई भी बैंक लोन देने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में वह फीस नहीं दे पा रहे हैं। स्टूडेंट का कहना है कि संस्थान के प्रबंधन की वजह से उनका भविष्य अधर में लटका है। प्रबंधन से कहा गया है कि कोर्ट का फैसला आने के बाद फीस जमा करा देंगे। दोपहर से लेकर शाम तक भूखे-प्यासे गेट के बाहर बैठे-बैठे फैशन डिजाइन के छात्र राकेश सांगवान की अचानक हालत बिगड़ गई। उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां से उसे देर रात छुट्टी दे दी गई। वहीं, कालेज प्रबंधन ने राकेश को एक रात के लिए हॉस्टल में रहने की अनुमति दे दी।

छात्राओं को दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम

फीस जमा नहीं करने पर जहां प्रबंधन ने छात्रों को हॉस्टल से बाहर निकाल दिया है, वहीं छात्राओं को 48 घंटे की मोहलत दी है। छात्राओं को अल्टीमेटम दिया गया है कि यदि इस अवधि तक फीस जमा नहीं कराई तो उन्हें भी बाहर निकाल दिया जाएगा। हालांकि, छात्राएं भी छात्रों के साथ आकर खड़ी हो गई हैं।
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पेट दर्द की वजह से तड़पता रहा छात्र, सुरक्षाकर्मी बोले कुछ नहीं कर सकते

संस्थान के गेट के बाहर धरने पर बैठे राकेश सांगवान की तबीयत अचानक खराब हो गई। वह पेट दर्द की वजह से तड़पने लगा। इस पर साथी छात्रों ने सुरक्षाकर्मियों से कहा कि राकेश को अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी मुहैया करा दो। मगर सुरक्षाकर्मियों ने अधिकारियों के आदेशों का हवाला देते हुए संस्थान के अंदर नहीं जाने दिया। इसके बाद छात्रों ने अधिकारियों को फोन किया, तब तक प्रबंधन ने छात्रों को अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी मुहैया करा दी थी। हालांकि, कोई भी अधिकारी अस्पताल तक नहीं गया।

लोन हो चुका पास, डिग्री विवाद के कारण रुका

गाजियाबाद के रहने वाले फुटवियर के छात्र आशुतोष का कहना है कि पढ़ाई के लिए एसबीआई से उनका लोन पास हो चुका था, लेकिन मामला कोर्ट में पहुंचने के कारण बैंक ने लोन रोक दिया है। बैंक का कहना है कि जब तक डिग्री विवाद का समाधान नहीं होता तब तक लोन नहीं दिया जा सकता है। ऐसा ही हाल अधिकतर छात्रों का है। ऐेसे में फीस कहां से लाकर दें?

यह है मामला

सत्र 2012 से 2014 तक के छात्रों की डिग्री पर विवाद चल रहा है। एफडीडीआई ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू किया था, लेकिन यूजीसी ने नियमों के विरुद्ध किए गए एमओयू को अमान्य कर दिया। इसके बाद इन बैच के छात्रों की डिग्री पर विवाद हो गया। अब इन्हें डिग्री कौन देगा यह बड़ा सवाल हो गया है। मामला सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में विचाराधीन है।


जिन छात्रों ने हॉस्टल की फीस नहीं दी है, उन्हें निकाला गया है। फीस जमा करने के लिए छात्राओं को भी 48 घंटे का समय दिया गया है। मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण छात्रों से टीचिंग फीस नहीं ले रहे, लेकिन छात्र पिछले एक साल से हॉस्टल फीस भी नहीं दे रहे। इस वजह से सख्ती बरती गई है।
- अतुल अस्थाना, सेंटर इंचार्ज एफडीडीआई रोहतक


हाईकोर्ट को 19 दिसंबर तक फैसला देने के निर्देश
एफडीडीआई की डिग्री को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता संदीप प्रियदर्शी ने बताया कि सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मामले में 19 दिसंबर तक हाईकोर्ट को फैसला देने के लिए कहा है। यदि फैसला नहीं होता है तो सुप्रीम कोर्ट जनवरी में फैसला देगा।
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