रोहतक। एक पिता के लिए अपने बच्चों के सपनों को पूरा करना ही जिंदगी का उद्देश्य होता है। अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए पिता कुछ भी करने को तैयार हो जाता है। ऐसा ही एक पिता हैं वीरेंद्र सैनी। जो मध्यप्रदेश के 13 वर्षीय बॉक्सर सूरज सैनी के पिता हैं। वह अपने बेटे को बॉक्सिंग की प्रैक्टिस में खर्च होने वाली राशि को फैक्ट्री की मेस में खाना बनाकर कमाते हैं।
सूरज सैनी भारतीय बॉक्सिंग संघ की ओर से राजीव गांधी खेल परिसर स्थित में नेशनल बॉक्सिंग एकेडमी में पहली बार करवाई जा रही पुरुष सब जूनियर कैटेगरी की नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भाग लेने आए हैं। इस चैंपियनशिप में उन्होंने अपने करियर का पहला पदक हासिल किया है। मध्यप्रदेश के चीफ कोच रोशनलाल ने बताया कि बॉक्सिंग संघ की ओर से करवाई जा रही इस चैंपियनशिप में देश भर के अलग-अलग राज्यों के खिलाड़ी खुद को तराश रहे हैं। सूरज का दो महीने पहले ही भोपाल बॉक्सिंग एकेडमी में चयन हुआ है। वह वहीं पर रहकर बॉक्सिंग सीखता है। इस प्रतियोगिता में सूरज ने 55 किलो भारवर्ग में कांस्य पदक हासिल किया। सेमीफाइनल मुकाबले में सूरज को हरियाणा के बॉक्सर से 5-0 से हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि सूरज को बॉक्सिंग करने की प्रेरणा बड़े भाई किशन से मिली। उन्हीं को देख-देखकर सूरज ने बॉक्सिंग करना शुरू किया था।