सांपला। फसल खराबे के मुआवजे की मांगों को लेकर किसान सभा व कई गावों के किसानों ने तहसील कार्यालय सांपला पर धरना दिया। धरने के बाद एसडीएम सांपला उत्सव आनंद को ज्ञापन सौंपा गया।
किसानों के अनुसार सांपला तहसील के दर्जनों गावों में जलभराव से 100 प्रतिशत फसलें बर्बाद हो गई हैं। खरीफ फसलों का भी मुआवजा नहीं मिला है। इन किसानों ने जल्द मुआवजा नहीं मिलने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
राज्य महासचिव सुमित दलाल ने कहा कि सरकार देश में खेती के कॉरपोरेट मॉडल को लागू करना चाहती है। इससे छोटे व माध्यम किसान उजड़ जाएंगे। कंपनियां खेती करेंगी। इसके तहत ही नीतियां बनाई जा रही हैं। इसके खिलाफ किसान बड़ा आंदोलन करेंगे।
किसान सभा के जिला प्रधान सुनील मलिक ने कहा कि सरकार किसानों के साथ धोखा कर रही है। जिले के दर्जनों गावों में बारिश व जलभराव से फसल बर्बाद हो चुकी है। अब मुआवजा न देकर सरकार किसानों पर आर्थिक चोट मारने पर तुली है। किसानों को यह भी नहीं बताया जा रहा है कि मुआवजा क्यों नहीं दिया गया।
सचिव आशीष ने कहा कि तहसील के कुल्ताना, पाकस्मा, खरावड़, चुलाना, मोरखेड़ी, अट्टायल, समचाना, कसरेंटी, भैंसरू गावों के सैकड़ों किसानों की खरीफ 2025 की फसल बर्बाद हो गई। इसमें धान, बाजरा, कपास फसलें में मुख्य हैं।
शत प्रतिशत नुकसान के मुआवजे की मांग को लेकर किसान तहसील परिसर पहुंचे। यहां धरना दिया। किसानों ने मुआवजा न मिलने से नाराज होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
किसानों ने धरने के माध्यम से सरकार की स्मार्ट मीटर योजना, नए बिल, मनरेगा खत्म करने के कानून का भी विरोध किया। इस मौके पर किसान सभा जिला उपाध्यक्ष प्रीत सिंह, तहसील कमेटी प्रधान नरेंद्र मलिक, देवीलाल राणा, सुभाष, संदीप दुहन, ओम सिंह, पवन, अशोक, संदीप, सतपाल, मुकेश, मित्र सिंह, कृष्ण, ओमप्रकाश, रामकिशन, शामिल रहे।