रोहतक। कौन कहता है, आसमान में छेद नहीं होता। कभी तबीयत से एक पत्थर उछालकर तो देखो। सुंदरपुर गांव के किसान का बेटा व एमडीयू का छात्र राहुल राठी ने कुछ यही साबित कर दिखाया है। यह युवा क्रिकेटर घर की आर्थिक तंगी से जूझते हुए विज्जी ट्राॅफी में जगह बनाने में सफल रहा है। वह अपने चचेरे भाई सोनू और शिव के बल्ले से खेलकर विज्जी ट्राॅफी में पहुंचे हैं। एमडीयू के चार खिलाड़ियों का विज्जी ट्राॅफी के लिए चयन हुआ है।
अगरतला में मार्च के मध्य में होने वाले टूर्नामेंट में यह खिलाड़ी नॉर्थ जोन की टीम में खेलेंगे। यहां नॉर्थ जोन के विश्वविद्यालयों की टीमें ट्राॅफी पर कब्जा जमाने पहुंचेंगी। टीम के चयन के बाद संवाद न्यूज एजेंसी से हुई बातचीत में राहुल ने अपना अब तक का संघर्ष साझा किया।
सुंदरपुर निवासी एमडीयू के छात्र राहुल राठी के पिता पवन कुमार किसान हैं। मां प्रियंका गृहिणी हैं। छोटा भाई रोहित स्कूल में पढ़ता है। वह पिछले चार साल से क्रिकेट खेल रहा है। क्रिकेट के प्रति जुनून इस कदर है कि भूख प्यास की परवाह किए बिना दिनभर अभ्यास करता रहता है। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर है। परिवार के पास दो किले जमीन ही है। परिवार ने भी बेटे की क्रिकेटर बनने की ख्वाहिश को कभी मरने नहीं दिया। भले ही पिता को ब्याज पर कर्ज लेना पड़ा हो, मगर बेटे को क्रिकेट किट जरूर दिलाई। इन विपरीत हालात से जूझते हुए यह युवा खिलाड़ी विज्जी ट्राॅफी तक पहुंचने में सफल रहा है। उसके चयन से परिवार में भी खुशी की लहर दौड़ गई है। संवाद
वर्ष 2013 में लकड़ी के बल्ले से खेलना शुरू किया। पिता रवि स्वरूप स्कूल में क्लर्क हैं। वे क्रिकेट अकादमी चलाते हैं। मां शशी गृहिणी हैं। भाई युगल व बहन रितिका दोनों क्रिकेट खेलते हैं। पिता को क्रिकेट का शौक था। उनका सपना है कि हम तीनों भाई-बहन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलकर देश व परिवार का नाम रोशन करें। लेफ्ट आर्म तेज गेंदबाज हूं। मोहम्मद शमी पसंदीदा गेंदबाज हैं। अंडर-19 कूच विहार ट्रॉफी व वीनू मांकड़ ट्रॉफी खेल चुका हूं। अंडर-23 सीके नायडू ट्रॉफी अंडर-23 प्रदेश की टीम में खेला हूं। इसके अलावा जेडसीए शिविर 2022 व 2023, एनसीए शिविर 2023, रणजी ट्रॉफी के शिविर 2021-2022, 2022-2023 व 2024-2025 में चयन हुआ है।
- इशांत भारद्वाज, छात्र, एमडीयू
वर्ष 2022 में वेस्टइंडीज में हुई अंडर-19 वर्ल्ड कप विजेता टीम का सदस्य रहा हूं। इसमें एक मैच खेलने का मौका मिला था। इसमें दो विकेट लिए। इसके अलावा भारत की ओर से अंडर-19 एशिया कप भी खेला, जिसमें टीम ने एशिया कप जीता है। 2021 में भारत की टीम से ट्राइंगल सीरिज खेला हूं। पिता अनिल व्यवसायी हैं। मां विनिता गृहिणी हैं। बड़े भाई वंश पायलट हैं। 2014 में 10 साल की उम्र में खेलना शुरू किया। पिता को क्रिकेट का शौक था। वे सुबह उठाकर साथ खेलने ले जाते थे। खुद गेंदबाजी करते थे। में ऑलराउंडर हूं। सचिन पसंदीदा खिलाड़ी हैं।
- गर्व सांगवान, छात्र, एमडीयू।
पिता जितेंद्र सिंह व्यवसायी हैं। मां सरिता गृहिणी हैं। वर्ष 2019 में रबड़ की गेंद से क्रिकेट खेलना शुरू किया था। पसंदीदा बल्लेबाज विराट कोहली हैं। उन्हीं से प्रेरणा मिलती है। पिता को क्रिकेट का शौक है। पिता ने ही बल्ला थमाया। अभी दिल्ली में हुई नार्थ जॉन इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में फाइनल मैच में शतक लगाया था। इसके अलावा प्रदेश की अंडर-19 से खेला हूं।
- आशीष सिवाच, छात्र, एमडीयू।
21सीटीके23-गर्व सांगवान। स्रोत:परिजन
21सीटीके23-गर्व सांगवान। स्रोत:परिजन
21सीटीके23-गर्व सांगवान। स्रोत:परिजन