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जबर्दस्त इंतजाम के साथ निकले हैं: हर झड़प और कार्रवाई का वीडियो बना रहे किसान, सोशल मीडिया पर वायरल करेंगे रील

Wed, 14 Feb 2024 06:35 PM IST
भूपेंद्र सिंह योगेश नारायण दीक्षित, अमर उजाला, रोहतक/लाखनमाजरा (हरियाणा)

सार

आगे बढ़ते ट्रैक्टर, सुरक्षा बलों के ड्रोन और आंसू गैस से भागते किसानों को कैमरे में कैद किया जा रहा है। ड्रोन से बरसते आंसू गैस के गोलों के वीडियो हर एंगल से बनाए जा रहे हैं।
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किसान आंदोलन के दौरान दातासिंह वाला बॉर्डर पर किसानों पर वाटर कैनन का प्रयोग करती पुलिस। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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दिल्ली कूच पर निकले पंजाब के किसान इस बार जबर्दस्त इंतजाम के साथ निकले हैं। आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए मोबाइल रिकाॅर्डिंग और सोशल मीडिया की ताकत का भरपूर इस्तेमाल करने की तैयारी है। आंदोलन को पटरी पर बनाए रखने और खुद को प्रताड़ित दिखाने के लिए वे हर झड़प और कार्रवाई के वीडियो और रील बना रहे हैं। किसानों के मार्च में सबसे ज्यादा वीडियो टीम नजर आ रही हैं जो हर घटना को बारीकी से कैमरे में कैद कर रही हैं।

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पंजाब से लगता जींद का दातासिंह वाला बाॅर्डर हो या अंबाला से लगता शंभू बैरियर, मंगलवार दोपहर बाद से प्रशासन की खड़ी बाधाएं तोड़ने के लिए किसान ट्रैक्टरों में लोहे के गार्टर लगाकर हरियाणा की ओर बढ़े तो उन पर ड्रोन से आंसू गैस के गोले गिराए गए। प्रशासन का दावा रहा कि किसान बेकाबू हुए तो पानी की धार और लाठीचार्ज तक करना पड़ा।

किसानों और सुरक्षा बलों की ओर से जहां पूरे दिन मशक्कत होती रही, वहीं पंजाब से आए युवाओं की कई टीमें बातचीत, तनातनी और पुलिस कार्रवाई के वीडियो बनाने में लगी रहीं। वीडियो बनाने के लिए किसानों के हाथ में हाई रेजोल्युशन कैमरे वाले मोबाइल फोन और हैंडी कैमरे देखे गए। पुलिस की हर कार्रवाई और ड्रोन से बरसते आंसू गैस के गोलों के वीडियो हर एंगल से बनाए जाते रहे।
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पुलिस कार्रवाई के बाद वापस पंजाब की ओर जाते किसानों के न सिर्फ वीडियो बनाए जा रहे थे, बल्कि इसी दौरान उनसे बातचीत की जाती रही। इन वीडियो में किसान कहते सुने जाएंगे कि पुलिस की रबड़ की गोली उनके कान के पास से अथवा छूती हुई निकल गई। किसान नेताओं का कहना है कि युवा वीडियो इसलिए बना रहे हैं, जिससे माहौल खराब होने की जिम्मेदारी आंदोलनकर्ताओं पर न डाली जा सके।

इंटरनेट चलते ही दिखेंगे वायरल वीडियो
जींद, कैथल या अंबाला हो अथवा शंभू बैरियर, सभी जगह इंटरनेट बंद होने से किसानों के बनाए वीडियो उनके मोबाइल तक सीमित होकर रह गए हैं। इसलिए मंगलवार को हुई झड़प के वीडियो बड़े पैमाने पर पंजाब-हरियाणा में वायरल नहीं किए जा सके हैं। किसान संगठनों की सोशल मीडिया टीमें इंटरनेट पर बैन हटते ही, एक-एक कर वीडियो और फोटो वायरल करेंगी, जिसमें दिखाने का प्रयास होगा कि उनकी तरफ से उकसाने की कार्रवाई नहीं हुई। कुछ वीडियो ऐसे इलाकों में भेजे गए हैं जहां इंटरनेट चल रहा है और वहां से इन्हें वायरल किया जा सके।

सुरक्षाबलों की ओर से भी की गई रिकॉर्डिंग
किसानों की बड़ी संख्या और हंगामे के खतरे को देखते हुए सुरक्षाबलों के जवानों ने भी हर कार्रवाई के वीडियो बनाए हैं। ऐसे युवाओं को कैमरे में कैद किया गया है जो मुंह पर रूमाल या पट्टी बांधे थे, लेकिन उनके हाथ में पत्थर दिख रहे थे। इसी तरह पुल की रेलिंग तोड़ने वालों और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचान वालों के फोटो और वीडियो पुलिस जमा कर रही है। पुलिस हर वह प्रमाण रख रही है जो कार्रवाई की मजबूती दिखा सके।

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