फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छह और छात्रों के परिजनों ने लगाई डीसी से गुहार, यूक्रेन के साथ रूस, जार्जिया व नेपाल में भी फंसे म्हारे बालक

विज्ञापन
बेटे के यूक्रेन से स्वदेश लाने के लिए डीसी आरएस वर्मा को मांगपत्र देते भाजपा नेता डा. दिनेश घिलौड? - फोटो : RohtakCity
विज्ञापन
यूक्रेन के अलावा रूस, जार्जिया व नेपाल में भी रोहतक के छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने गए हैं। लेकिन कोरोना के संक्रमण के कारण दुनिया भर में लगे लॉकडाउन से वे वहां फंस गए हैं। भाजपा नेता के अलावा छह और छात्रों के परिजन बुधवार को डीसी ऑफिस पहुंचे और डीसी के माध्यम से सरकार से छात्रों को स्वदेश लाने की मांग की। वहीं, सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने बुधवार को विदेश मंत्री एस जयंशकर को पत्र भेजकर यूक्रेन में फंसे करीब 10 हजार भारतीय छात्रों समेत सभी को वापस लाने की मांग उठाई है। पत्र के साथ सांसद ने अमर उजाला में प्रकाशित खबर की प्रति भी संलग्न की है।
विज्ञापन

सांसद शर्मा ने विदेश मंत्री को पत्र लिखा कि उन्होंने 31 मार्च को विदेश मंत्रालय में पत्र भेजा था जिसमें यूक्रेन में भारतीय दूतावास द्वारा वहां मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों की कोरोना के संक्रमण से सुरक्षा की मांग की है। रोहतक के एक छात्र ने ई-मेल करके बताया है कि पहले यूक्रेन में हालात कंट्रोल में थे, लेकिन अब कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। छात्र का कहना है कि इससे यूक्रेन में 10 हजार भारतीय छात्रों की सुरक्षा पर सवाल लगने लगा है। सांसद ने लिखा है कि छात्र बता रहे हैं कि यूक्रेन में सख्ती से लॉकडाउन का पालन नहीं हो रहा है। ऐसे में मानवीय आधार पर छात्रों की न केवल सहायता की जाए, बल्कि उनको वापस वतन लाया जाए।
रसिया में पढ़ रही सांपला की बेटी, मां से कहा - अभी हालात ठीक हैं
स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने बताया उसकी बेटी रसिया वोरनेज यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। फिलहाल उसका चतुर्थ साल है। परिवार के दो बच्चे भी वहीं पढ़ रहे हैं। बेटी से फोन पर बात हुई है। वह हॉस्टल में सुरक्षित हैं। क्योंकि रूस के उस एरिया में कोरोना ज्यादा नहीं फैला है। अभी यहां हालात ठीक हैं। छात्रों का भी वहां की सरकार टेस्ट करवा रही है। फिलहाल बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। जून में परीक्षाएं खत्म होनी थी। 17 जून को वापसी थी। अब देखते हैं वहां क्या स्थिति रहती है। वैसे बच्चों की चिंता तो है, लेकिन अभी जिला प्रशासन से बच्चों को वापस लाने की मांग नहीं की है। वहीं, एक डॉक्टर ने बताया कि उसकी बेटी भी रूस में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है, लेकिन उस एरिया में हालात बिल्कुल सामान्य है।
विज्ञापन

उक्त छात्रों के परिजन पहुंचे डीसी ऑफिस
छात्र देश
अनुवाक यूक्रेन
अंकुर नेपाल
निकिता यूक्रेन
नेहा यूक्रेन
शुभम यूक्रेन
साहिल कुमार रूस
अर्चित जार्जिया
जो भी अभिभावक अपने बच्चों को विदेश से वापस बुलाना चाहते हैं। वे तत्काल ब्योरा प्रशासन को उपलब्ध कराएं, ताकि सूची बनाकर मुख्यालय भेजी जा सके। सरकार विदेश में फंसे छात्रों को निकाल कर लाने का प्रयास कर रही है।
विज्ञापन

- आरएस वर्मा, डीसी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें