डीएमएस डॉ. संदीप ने बताया कि उन्हें भी मौखिक शिकायत मिली थी कि संस्थान में कुछ असामाजिक तत्व अपने आपको बतौर डॉक्टर बताकर मरीजों व स्टाफ को मूर्ख बनाकर रुपये ऐंठते हैं। इसी क्रम में जब मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने पकडे़ गए व्यक्ति की जानकारी दी तो वह मौके पर आए और पुलिस को इसकी सूचना दी। पकडे़ गए व्यक्ति ने तरह-तरह के बहाने बनाए। डीएमएस ने मुख्य सुरक्षा अधिकारी को कहा कि वह संस्थान में आने वाले हर संदिग्ध व्यक्ति पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर उसका पहचान पत्र जांचें।
डीएमएस ने दी पुलिस में लिखित शिकायत
डीएमएस डॉ. संदीप की ओर से पीजीआईएमएस थाना को दी गई लिखित शिकायत के मुताबिक, 15 नवंबर को दिन में 11 बजे एक व्यक्ति को अप्रैन और स्टैथो के साथ पकड़ा है। युवक ने अपना नाम पवन निवासी भिवानी लाजपत नगर बताया है। पवन ने बातचीत में स्वयं की गलती मानी है और बताया कि वह निशुल्क एंबुलेंस सर्विस देेकर असहाय मरीजों की मदद करता है, लेकिन उसने अप्रैन पहनने और स्टैथो साथ रखने का मकसद नहीं बताया।
लघु शंका के बहाने थाने से भागा आरोपी
पीजीआईएमएस थाने के नए भवन की ऊंची दीवारों को फर्जी डॉक्टर पलभर में लांघ गया। लघु शंका के बहाने शौचालय के रास्ते थाने से बाहर निकल गया। पुलिस को जब उसके फरार होने का पता लगा तो कंट्रोल रूप से वीटी कराई गई। इसके बाद पुलिस देर रात तक उसे तलाशने में जुटी रही।
संस्थान में फर्जी डॉक्टर मिलने का कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी फर्जी आईपीएस अधिकारी बन कर आना और स्टाफ को धमकाना, फर्जी डीएमएस बन कर आना और राउंड लेना, फर्जी डॉक्टर बन कर आपरेशन थियेटर तक आना-जाना स्टाफ को धमकाने जैसे मामले सामने आ चुके हैं। डीएमएस डॉ. संदीप की ओर से इन सभी पर कानूनी कार्रवाई की गई और सभी पर मामले विचाराधीन है।
डॉ. संदीप ने बताया कि संस्थान में रोजाना दस हजार से अधिक जनता का आवागमन होता है। इसके अलावा चार से पांच हजार डॉक्टर व अन्य स्टाफ हैं, ऐसे में कुछ लोग अपने गलत मंसूबों को अंजाम देते हैं। संस्थान में अवैध रूप से लाखों का इम्प्लांट भी जब्त किया जा चुका है और यह केस हाईकोर्ट में विचाराधीन है। सूत्रों की मानें तो सरकारी कैंपस में दिनभर निजी लैब, निजी अस्पतालों के दलाल घूमते रहते हैं, जो मरीजों को ठगने की फिराक में रहते हैं।
संस्थान के मुख्य सुरक्षा अधिकारी व डीएमएस ने संदिग्ध युवक को पकड़ा है। बताया जा रहा है कि वह फर्जी डॉक्टर बन कर आया था। उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया है। ऐसी समस्या भविष्य में न आए, इसलिए सभी विभागाध्यक्षों व प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया जाएगा कि वह बगैर पहचान पत्र के संस्थान में न आएं। सभी को पहचान पत्र जारी किया जा चुका है। सुरक्षा गार्डों द्वारा पहचान पत्र मांगे जाने पर उसे दिखाया जाना चाहिए, ताकि ऐसे फर्जीवाड़ा करने वालों पर नकेल कसी जा सके। - डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस