रोहतक। आंखों में सूखापन और खुजली होना बार-बार बच्चों के चश्मे का नंबर बढ़ा रहा है। आंखों में सूखापन का कारण नजदीक से डिस्प्ले मॉनिटरिंग ही है। बच्चे कितने पास से स्क्रीन देख रहे हैं उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती है क्योंकि वह तो बच्चे हैं। इसका ख्याल मां-पिता को रखना है। आंखें खराब होने का मुख्य कारण पौष्टिक आहार ग्रहण करना नहीं है। साथ ही आंखों से पानी आना या उम्र के साथ आई बॉल (नेत्रगोलक) बढ़ना आंखों के नंबर बढ़ने का कारण हो सकता है।
ठंड में बच्चे कंबल के अंदर मोबाइल फोन की स्क्रीन देख रहे हैं। इससे बैकग्राउंड में पूरी तरह से अंधेरा होने के साथ-साथ स्क्रीन भी काफी करीब होता है। इससे जल्दी चश्मों का नंबर बढ़ता है। इसके अलावा क्रोनिया का आकार बदलने से भी आंख चश्मा का नंबर बढ़ता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ 3 से पांच उम्र के बच्चों का नियमित चेकअप कराने की सलाह देते आ रहे हैं। साथ ही बच्चों को टीवी से 10 से 15 फीट की दूरी से देखने की सलाह दे रहे हैं। मोबाइल से यह दूरी 35-45 सेंटीमीटर कम नहीं होनी ही चाहिए। इसके अलावा स्क्रीन टाइम का भी ख्याल रखने की आवश्यकता है।
आंखों का नंबर बढ़ने का यह भी कारण
-आखों का ब्लड प्रेशर बढ़ना।
-डायबिटीज।
-विटीमन बी-12 और ए का कम होना।
-शरीर का ज्यादा वजन होना।
-पिछले दो माह में दस हजार मरीजों ने कराई आंखों की जांच
नागरिक अस्पताल में दो माह 10000 के करीब नेत्र रोगियों की जांच की गई। इसमें 5 प्रतिशत बच्चे रहे। यह संख्या करीब 500 है, नेत्र जांच कर उन्हें चश्मा दिया गया है। इसमें कई बच्चे ऐसे भी रहे जिन्हें नजर संबंधित समस्या थी, स्कूल में लगे नेत्र जांच शिविर पकड़ी गई। ऐसी मामलों में माता-पिता स्क्रीन प्ले की आदत की बात हैं।
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बच्चों की आंखों में पानी आना या आंखें सूखी लग रही हैं। बच्चा बार-बार हाथ आंखों पर लेकर जा रहा है। आंखों में खुजली कर रहा है। इस आदत को अनदेखा नहीं करना है। तुरंत आंखों के विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराएं। आखों के चश्मे का नंबर बढ़ने का कारण एक प्रतिशत भी पौष्टिक आहार नहीं है, लेकिन संतुलित व पौष्टिक आहार लेने से अन्य बीमारियों दूर रहती हैं।
- डॉ. सतिंद्र वशिष्ठ, उप चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल