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कोरोना में छिन गया पिता का साया, मिला उम्रभर का जख्म

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सोनीपत। कोरोना महामारी ने बहुत से लोगों को जीवन भर का जख्म दिया है। किसी ने बेटा खो दिया तो किसी का पिता उससे सदा के लिए दूर चला गया। दुनिया में इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता जब किसी के सिर से पिता का साया उठ जाए।
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इससे फर्क नहीं पड़ता कि पिता को खोने वाले की उम्र क्या है। पिता की जरूरत तो हर उम्र में पड़ती है। हर साल जब फादर्स-डे आता था तो बच्चे अपने पिता पर प्रेम न्यौछावर करते थे, गिफ्ट देकर और उनके साथ खुशी मनाकर अलग ही आनंद की अनुभूति करते थे। लेकिन इस बार कोरोना ने ऐसा जख्म दिया है कि फादर्स-डे भी फीका हो गया है। एक तरफ ऐसे बच्चे हैं जिनके सिर से पिता का साया उठ गया तो दूसरी तरफ वह पिता हैं जिनकी औलाद को कोरोना ने सदा के लिए उनसे छीन लिया है।
पिता का सपना पूरा करने को करूंगा कड़ी मेहनत
गांव राई निवासी धीरज के पिता दारा सिंह का 27 अप्रैल को कोरोना से निधन हो गया। धीरज कहते है कि पिता के निधन से पूरा परिवार टूट गया है। उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता। मेरे पिता चाहते थे कि बेटा सरकारी नौकरी करे। उनके सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करूंगा। मेरे पिता सदैव अलग पहचान बनाने की सीख देते थे। अब उनका सपना पूरा करना ही मेरे जीवन का उद्देश्य है।
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चार साल के विहान पर टूटा दुखों का पहाड़, खो दिया पिता
मूलरूप से गांव हुल्लाहेड़ी फिलहाल टीकाराम कॉलेज के पास रहने वाले दिल्ली पुलिस के जवान अमित को कोरोना ने लील लिया था। उसके बाद तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया। अमित (32) का बेटा विहान अभी महज चार साल का है। उसकी बहन ओजस्वी ने तो पिता के संसार से जाने के बाद ही जन्म लिया है। अमित की पत्नी पूजा दोनों बच्चों का लालन-पालन कर रही है। अमित ने 5 मई, 2020 को कोरोना के चलते जान गंवाई थी। उनके पिता बलजीत सिंह बुजुर्ग हो चुके हैं। वह बोल और सुन नहीं सकते। कोरोना वारियर्स अमित राणा के निधन के बाद दिल्ली सरकार ने उन्हें एक करोड़ रुपये सहायता राशि देने की घोषणा की थी, जो अभी तक नहीं मिल सकी है। उसके बावजूद उनकी पत्नी पूजा कहती है कि वह बेटे को उच्च शिक्षित कर अलग पहचान बनाने में मदद करेंगी।
मोंटी ने दस साल की उम्र में पिता व ताऊ को खो दिया
गांव दातौली के रहने वाले मोंटी ने महज दस साल की उम्र में पिता व ताऊ को खो दिया है। कोरोना का कहर परिवार पर ऐसा बरपा की दस दिन में ही दो भाइयों को लील लिया। पहले ताऊ हवा सिंह का कोरोना से निधन हुआ और फिर पिता सुरेंद्र सैनी भी कारोना से जिंदगी की जंग हार गए। सुरेंद्र सैनी के बेटे मोंटी को उनके पिता हमेशा नैतिक मूल्यों के साथ जीवन जीने की सीख देते थे। मोंटी कहते हैं कि पिता के आश्रय में बिताए जीवन के पल वह कभी नहीं भूल पाएगा। मई में दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है जिसने परिवार को बिखेर दिया। अब कड़ी मेहनत कर जीवन को नई ऊंचाई पर लेकर जाऊंगा, यहीं मेरे पिता के प्रति मेरी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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