रोहतक। डाॅ. पुष्पा दहिया ने बताया कि यदि सफेद पानी आता हो, माहवारी बंद होने के बाद भी खून आए या ज्यादा माहवारी आए तो यह बच्चेदानी या बच्चेदानी के मुहाने का कैंसर हो सकता है। 25 साल के बाद हर महिला को तीन साल में पैप स्मीयर (बच्चेदानी के मुंह की पानी की) जांच करानी चाहिए। आजकल 9 से 14 वर्ष की उम्र के लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन की दो डोज लगवाने से उनमें बच्चेदानी के मुंह के कैंसर का बचाव किया जा सकता है।
विश्व कैंसर दिवस पर चौधरी रणबीर सिंह ओपीडी के स्त्री व प्रसूति रोग विभाग में आईं महिलाओं व उनके परिजनों को ब्रेस्ट कैंसर व बच्चेदानी के कैंसर के बारे में पोस्टरों व व्याख्यान के माध्यम से जागरूक किया। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के स्त्री व प्रसूति रोग विभाग की चिकित्सकों की ओर से विभागाध्यक्ष डाॅ. पुष्पा दहिया के दिशा-निर्देशन में बुधवार को जागरूकता अभियान चलाया गया।
डॉ. पुष्पा दहिया ने बताया कि उनके विभाग का प्रयास रहता है कि हर वर्ष ओपीडी में आने वाले मरीजों को महिलाओं में होने वाले कैंसर के बारे में जागरूक किया जाए। महिलाओं में अधिकतर बच्चेदानी का, सर्वाइकल व ब्रेस्ट कैंसर होता है। डाॅ. पुष्पा दहिया ने बताया कि कैंसर एक जानलेवा बीमारी है, जिससे पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कैंसर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। जब शरीर की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से विभाजित और विकसित होने लगती हैं तो कैंसर की समस्या पैदा होती है। महिलाओं के प्रजनन अंगों में होने वाले कैंसर को गायनेकोलॉजिकल कैंसर कहते हैं। शोध के मुताबिक, दुनियाभर में कैंसर के कारण लाखों महिलाओं की मौत होती है, लेकिन अधिकतर मामलों में उनकी मौत का मुख्य कारण गायनेकोलॉजिकल कैंसर होता है।
डॉ. मीनाक्षी ने मरीजों को बताया कि किस प्रकार से कैंसर की पहचान की जाए और उसकी कहां व कैसे जांच करवाएं। डाॅ. वंदना ने कहा कि पीजीआईएमएस में महिलाओं के कैंसर की जांच के लिए हर वीरवार को ओपीडी में विशेष क्लीनिक चलाया जाता है। इस अवसर पर स्त्री व प्रसूति विभाग के चिकित्सक व सैकड़ों महिलाएं उपस्थित थीं।