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Rohtak News: अब सरपट दौड़ेगी विकास की गाड़ी

Thu, 06 Feb 2025 01:55 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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फोटो : 03रेवाड़ी-रोहतक मार्ग को जोड़ने वाला ट्रैक। संवाद
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रेवाड़ी। रेवाड़ी-काठूवास के बीच 27 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का करीब 25% दोहरीकरण का कार्य पूरा हो चुका है। इस पर करीब 352 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। वहीं, काठूवास से नारनौल के बीच 24 किलोमीटर रेलवे ट्रैक पर करीब 313 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इसका करीब 40% कार्य पूरा हो चुका है। दूसरी तरफ अस्थल बोहर- रेवाड़ी लाइन का दोहरीकरण होगा। यह रेलवे लाइन 75.20 किलोमीटर के आसपास का रहेगा। अब इस रेलवे लाइन के दोहरीकरण के लिए 752 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी।
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रेवाड़ी से काठूवास व अस्थल बोहर तक रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण के बाद ट्रेनों की रफ्तार में भी काफी तेजी आएगी। रेवाड़ी अस्थल बोहर यह रेलवे लाइन 75.20 किलोमीटर के आसपास का है। दोहरीकरण के कार्य को लेकर वर्ष 2022 में सर्वे भी हुआ था। इससे यहां पर ट्रेनों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है। अभी यहां से चुनिंदा ट्रेनें ही गुजरती हैं। इसमें से कुछ ट्रेनें तो रात में जाती हैं। इससे लोगों को परेशानी होती है। इस रेलवे लाइन के डबल होने से सीधे तौर पर रेवाड़ी क्षेत्र के लोगों को काफी फायदा होगा। रेल सेवाएं बढ़ने के साथ-साथ इस रेलवे लाइन पर माल ढुलाई का कार्य भी बढ़ेगा। लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। व्यापारियों के लिए भी रेल के माध्यम से सामान को दूसरे स्थानों पर भेजने और अन्य स्थानों से सामान मंगवाने के लिए भी सुविधाएं बढ़ेंगी।

अभी काठूवास तक 27 किलोमीटर का सफर 39 मिनट में होता है तय

अभी रेवाड़ी से काठूवास तक 27 किलोमीटर का सफर तय करने के लिए एक्सप्रेस ट्रेनों को करीब 37-39 मिनट तक का समय लग जाता है, जबकि स्पेशल ट्रेनें करीब 31 से 32 मिनट तक का समय लेती हैं। मौजूदा समय में रेवाड़ी रेलवे स्टेशन से काठूवास तक करीब पांच ट्रेनें चलती हैं। रेवाड़ी से काठूवास के बीच में खोरी, पाली, कुंड रेलवे स्टेशन पड़ते हैं। काठूवास गांव में काठूवास रेलवे स्टेशन के पुराने भवन के स्थान पर नया रेलवे स्टेशन व क्वार्टर बनाया जा रहा है। काठूवास का रेलवे स्टेशन 1982 में स्थापित किया गया था।
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75 किलोमीटर के सफर में लगता है 1:15 घंटे

रेवाड़ी से अस्थल बोहर रेलवे स्टेशन की बात करें तो 75 किलोमीटर का सफर तय करने में एक घंटा 15 मिनट का समय लग जाता है। रेवाड़ी और अस्थल बोहर के बीच गोकलगढ़, पाल्हावास, माछरौली, झज्जर, डीघल, रेलवे स्टेशन आते हैं। अस्थल बोहर के बाद रोहतक स्टेशन आता है। इस रूट पर करीब तीन ट्रेनें चलती हैं। रोजाना एक रेवाड़ी रोहतक पैसेंजर ट्रेन चलती है। रविवार को छोड़कर बाकी दिनों में 2 ट्रेनों का संचालन होता है। सिंगल रेलवे लाइन होने के कारण ट्रेनों की संख्या भी काफी कम है, जबकि यहां से बड़ी संख्या में लोग रोहतक की तरफ जाते हैं। ट्रेनों की संख्या कम होने के कारण लोग रोहतक के लिए बसों का ही सहारा लेते हैं। दोहरीकरण के बाद रेलवे को भी इस रूट पर काफी फायदा होगा।

सिंगल ट्रैक होने से होता है यह नुकसान

सिंगल ट्रैक पर यात्रियों की संख्या कम रहती है। लंबी दूरी की ट्रेनें नहीं चल पातीं। ट्रैक पर यात्रा करने में भी देरी होती है। ट्रैक पर लंबी मालगाड़ियां चलने में दिक्कत होती हैं। ट्रैक पर सुरक्षा संबंधी कमियां होती हैं। सिंगल ट्रैक पर एक ही समय में कम ट्रेनें चल सकती हैं। सिंगल ट्रैक पर एक विलंबित ट्रेन, दूसरी ट्रेन को देरी करा सकती है। सिंगल ट्रैक पर कोई आरक्षित ट्रैक नहीं होता। सिंगल ट्रैक पर मध्यवर्ती लोडिंग या अनलोडिंग में समय और पैसे की बर्बादी होती है। कोई ट्रेन सामने से आ रही है तो दूसरी ट्रेन को रोकना पड़ता है और उसे रास्ता देना होता है।
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